बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बिजली कटौती से 100 से अधिक स्मार्ट क्लास प्रभावित, पढ़ाई पर पड़ रहा असर
खबर सार :-
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी में लगातार बिजली कटौती से 100 से अधिक स्मार्ट क्लास प्रभावित हैं। इनवर्टर और जनरेटर की क्षमता कम पड़ने से पढ़ाई, प्रैक्टिकल और रिसर्च पर असर पड़ रहा है।
खबर विस्तार : -
झांसीः बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में इन दिनों लगातार हो रही विद्युत कटौती विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। विश्वविद्यालय में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 100 से अधिक स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं, लेकिन बिजली की लगातार आवाजाही के कारण इनका संचालन प्रभावित हो रहा है। बिजली कटौती इतनी अधिक हो रही है कि कई बार स्मार्ट क्लास में लगाए गए इनवर्टर भी जवाब दे जाते हैं। ऐसे में प्रोजेक्टर, डिस्प्ले, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल संसाधन मौजूद होने के बावजूद कक्षाओं में उनका इस्तेमाल नहीं हो पाता।
बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर केवल सामान्य कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोगात्मक कार्य और शोध कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराने के बजाय कई बार पारंपरिक तरीके से कक्षा संचालित करनी पड़ती है। कुछ मौकों पर बिजली आने का इंतजार करते-करते पूरी कक्षा का समय प्रभावित हो जाता है।
छोटे जनरेटर पर बढ़ रहा लोड
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिजली कटौती से निपटने के लिए जनरेटर की व्यवस्था भी की है, लेकिन बड़े जनरेटर में खराबी के कारण कई बार छोटे जनरेटर के सहारे काम चलाना पड़ता है। इससे उपलब्ध क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जब जनरेटर पर लोड बढ़ जाता है तो विभागों, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं की बिजली आपूर्ति को काटकर लोड को व्यवस्थित करने की स्थिति बनती है। विद्यार्थियों का आरोप है कि बिजली जाने के बाद प्रशासनिक भवन और अधिकारियों के कक्षों में बिजली आपूर्ति बनाए रखना प्राथमिकता में रहता है, जबकि कक्षाओं और विद्यार्थियों से जुड़े क्षेत्रों की अनदेखी होती है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बिजली व्यवस्था को सुधारने के प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है।
कई विभागों में समस्या
गुरुवार को भी विश्वविद्यालय के कई विभागों में सुबह से ही बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। इससे कक्षाओं का संचालन बाधित हुआ। स्मार्ट क्लास में इनवर्टर की सुविधा होने के बावजूद लंबे समय तक बिजली कटौती होने पर उनकी क्षमता भी जवाब देने लगती है। इसके बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों को बिजली बहाल होने का इंतजार करना पड़ता है। स्मार्ट क्लास का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रोजेक्टर, डिजिटल कंटेंट, कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों के जरिए बेहतर शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन जब इन संसाधनों के संचालन के लिए आवश्यक बिजली ही लगातार उपलब्ध नहीं रहती तो डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य प्रभावित होता है।
प्रयोगशाला आधारित विषयों पर ज्यादा असर
बिजली कटौती का सबसे अधिक असर विज्ञान और प्रयोगशाला आधारित विषयों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। प्रयोगशालाओं में कई उपकरण बिजली से संचालित होते हैं। ऐसे में बिजली चले जाने पर प्रैक्टिकल कार्य रोकना पड़ता है। कई बार निर्धारित समय में प्रयोग पूरा नहीं हो पाता, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक कार्यक्रम पर असर पड़ता है। शोधार्थियों के लिए भी लगातार बिजली कटौती परेशानी का कारण बन रही है। शोध कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और कंप्यूटर आधारित गतिविधियों के लिए निर्बाध बिजली की आवश्यकता होती है। बार-बार बिजली जाने से शोध कार्य की गति प्रभावित होने की स्थिति बन रही है।
वर्षों पुरानी समस्या
विश्वविद्यालय में बिजली कटौती की समस्या कोई नई नहीं है। यह समस्या वर्षों से सामने आती रही है और हर बार बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ विद्यार्थियों को इसका सामना करना पड़ता है। अब आवश्यकता के अनुरूप बिजली बैकअप व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। विश्वविद्यालय में अलग-अलग क्षेत्रों और भवनों के लिए स्वतंत्र बैकअप व्यवस्था, जरूरत के मुताबिक जनरेटर क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय में 100 से अधिक स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं तो इनके संचालन के लिए निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
व्यवस्था सुधारने का प्रयास जारी
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में इन दिनों बिजली की आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है। कई बार जनरेटर पर लोड अधिक होने के कारण परिसर में स्थित विभागों और कक्षाओं की बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार बिजली कटौती के बीच अब विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और शोध कार्यों के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद बैकअप उपलब्ध कराने की है। यदि बिजली व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो डिजिटल शिक्षा के लिए तैयार की गई स्मार्ट क्लास का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाना मुश्किल बना रहेगा।
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