बिहार में चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर! तेज बारिश और हवाओं से जनजीवन प्रभावित; दो जिलों में 'रेड अलर्ट'
खबर सार :-
बिहार में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर दिखने लगा है। राज्य में बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो चुका है। मौसम विभाग ने 31 अक्टूबर तक चक्रवात का असर रहने की संभावना जताई है।
खबर विस्तार : -
पटना: चक्रवात 'अर्नब' के असर के कारण, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को बिहार के कई जिलों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। सीतामढ़ी और मधुबनी के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है, जहां बहुत भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका है।
दरभंगा, शिवहर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। यहां भारी बारिश, आंधी-तूफान और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। पटना सहित कई अन्य जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है, जिसमें बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने को लेकर चेतावनी दी गई है।
31 अक्टूबर तक सक्रिय रहेगा मौसम
लोगों को सतर्क रहने और अपने-अपने जिलों के लिए जारी मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस मौसमी प्रणाली का असर 31 अक्टूबर तक रहने की उम्मीद है। IMD ने बिहार के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में भारी गिरावट का भी अनुमान जताया है; बारिश के बाद मौसम और अधिक ठंडा होने की संभावना है।
बारिश से गिरा तापमान, बढ़ी ठंड
मौसम में आए इस बदलाव के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में समय से पहले ही सर्दियों जैसी ठंड महसूस होने लगी है। खासकर पटना में, आसमान में बादल छाए रहने और बीच-बीच में बारिश होने के कारण तापमान में काफी गिरावट आई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण जलजमाव हो सकता है, जिससे प्रभावित इलाकों में जनजीवन बाधित हो सकता है। तेज हवाएं और बिजली गिरना उन लोगों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं जो घर के बाहर काम करते हैं।
लोगों से सावधान रहने की दी सलाह
लोगों को सलाह दी गई है कि आंधी-तूफान के दौरान किसी सुरक्षित और बंद इमारत के अंदर शरण लें। बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें, पेड़ों के नीचे खड़े न हों और खुली जगहों से दूर रहें। मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन और सरकारी सलाह पर ही भरोसा करें। IMD द्वारा जारी जिला-वार चेतावनियों के अनुसार, बिहार के कुछ हिस्सों में खराब मौसम की स्थिति शनिवार, 31 अक्टूबर तक बनी रह सकती है। चक्रवात 'अर्नब' ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ओडिशा, झारखंड और बिहार के तटीय इलाके भी इससे प्रभावित हुए हैं।
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धान की फसल को भारी नुकसान
बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर भागलपुर जिले में साफ तौर पर देखा जा सकता है। पिछले दो दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाओं के कारण जिले के कई ब्लॉकों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के झोंकों से जमीन पर गिर गई है, जिससे किसान बेहद निराश हैं। इस साल मानसून अच्छा रहने के कारण किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन इस अचानक आए प्राकृतिक संकट ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिले के ज्यादातर हिस्सों में धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है और कई इलाकों में कटाई की तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में फसल के गिर जाने से बालियों से दाने झड़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खेतों में पानी जमा होने से गिरी हुई फसलों में नमी बढ़ जाएगी, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब होने या फसल के सड़ने की आशंका है।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
जगदीशपुर के किसान राजकुमार पंजियारा ने बताया कि उन्होंने साल भर कड़ी मेहनत करके यह फसल उगाई थी, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। उन्हें उम्मीद थी कि दिवाली के आसपास फसल बेचकर वे अपना कर्ज चुका देंगे, लेकिन बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब उनके पास न तो अपने खाने के लिए पर्याप्त अनाज बचा है और न ही कर्ज चुकाने का कोई रास्ता। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नुकसान का तुरंत आकलन किया जाए और मुआवजा दिया जाए। वहीं, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन्होंने अपनी फसल काट ली है, वे उसे तुरंत किसी सुरक्षित और सूखी जगह पर ले जाएं। अगर अनाज खुले में रखा है, तो उसे तिरपाल से ढक दें। अनाज को स्टोर करने से पहले उसे अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए, ताकि नमी के कारण उसमें फफूंदी न लगे।
खेतों में जमा पानी को निकालें किसान
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि किसानों को खेतों में जमा पानी को निकालने का इंतजाम भी किया जाना चाहिए। चक्रवात से हुए अचानक नुकसान से परेशान किसान अब सरकार और जिला प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और खेत तैयार करने के खर्च के लिए बैंकों और सहकारी समितियों से कर्ज लिया था। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही फसल के नुकसान का आकलन नहीं किया और आर्थिक मदद नहीं दी, तो उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
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