Bihar Cabinet का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मियों का डीए बढ़ा, जनवरी 2026 से मिलेगा लाभ
खबर सार :-
बिहार कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले राज्य के कर्मचारियों, युवाओं और उद्योग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। डीए बढ़ोतरी से सरकारी कर्मियों को राहत मिलेगी, जबकि ईवी योजना और एआई मिशन राज्य को तकनीकी और पर्यावरणीय विकास की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। साथ ही औद्योगिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासनिक ढांचे के विस्तार से रोजगार और कानून-व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
खबर विस्तार : -
Bihar cabinet DA hike: बिहार सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार के इस फैसले के बाद सप्तम केंद्रीय पुनरीक्षित वेतन संरचना के तहत आने वाले कर्मचारियों का डीए 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यह नई दर 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
राज्य सरकार के अनुसार, छठे वेतनमान के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों और पेंशनधारकों का महंगाई भत्ता 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत किया गया है। वहीं पांचवें वेतनमान वालों का डीए 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और उनकी क्रय शक्ति मजबूत होगी।
कैबिनेट बैठक में 19 प्रस्तावों पर लगी मुहर
बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इनमें प्रशासनिक, औद्योगिक, तकनीकी और पर्यावरणीय क्षेत्रों से जुड़े कई अहम निर्णय शामिल रहे। बैठक के बाद अधिकारियों ने बताया कि अपराध और सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले पांच जिलों-पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान-में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पांच नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन जिलों में अतिरिक्त पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था से कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

वैशाली में बनेगा राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान
औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने वैशाली जिले में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की स्थापना को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके लिए 100 एकड़ भूमि केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। यह भूमि 1243.45 एकड़ रैयती जमीन में से चयनित की जाएगी, जिसका अधिग्रहण आधारभूत संरचना विकास प्राधिकरण, पटना के माध्यम से किया जा रहा है। अंतिम भूमि चयन का अधिकार निदेशक परिषद को दिया गया है। माना जा रहा है कि इस संस्थान के बनने से बिहार में फूड प्रोसेसिंग उद्योग को नया आयाम मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
इलेक्ट्रिक वाहन नीति से रोजगार और पर्यावरण दोनों को बढ़ावा
कैबिनेट बैठक में “मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना” को भी मंजूरी दी गई। इस योजना का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और वाहनजनित प्रदूषण को कम करना है। सरकार ने वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। यह पहल वैश्विक “ईवी 30एट30” अभियान के अनुरूप मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित होगी। साथ ही वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बिहार को एआई हब बनाने की तैयारी
बिहार सरकार ने राज्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” के तहत सिंगापुर की संस्था “ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क” का चयन किया गया है। सरकार के अनुसार, यह संस्था बिहार में एआई आधारित पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में सहयोग करेगी। इसके साथ ही आर्यभट्ट दृष्टि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 209 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार में तकनीकी शिक्षा और डिजिटल इनोवेशन को नई दिशा मिलेगी।
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