भीलवाड़ा कांग्रेस में 17 सिंबल विवाद फिर गरमाया, तीन बंदरों के साथ मनोज पालीवाल का पैदल मार्च

खबर सार :-

गांधी जयंती पर भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 चुनावी सिंबल विवाद को लेकर PCC सदस्य मनोज पालीवाल ने तीन बंदरों के प्रतीक के साथ पैदल मार्च निकाला और प्रदेश नेतृत्व से जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
सिंबल विवाद फिर गरमाया, मनोज पालीवाल का पैदल मार्च

खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: गांधी जयंती के मौके पर भीलवाड़ा कांग्रेस में नगर निगम चुनाव से जुड़ा 17 चुनावी सिंबल का विवाद एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सदस्य मनोज पालीवाल ने शुक्रवार को अनूठे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। वह तीन युवकों को महात्मा गांधी के तीन बंदरों के प्रतीक के रूप में साथ लेकर पैदल मार्च पर निकले। हाथ में लाठी और तीन बंदरों के प्रतीक के साथ पालीवाल भोपाल क्लब के बाहर स्थित गांधी प्रतिमा से जिला कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचे।

गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद शुरू हुए इस मार्च के जरिए पालीवाल ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराई। उनका कहना है कि भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न नहीं मिल पाने के मामले में वह करीब एक महीने से प्रदेश नेतृत्व के सामने अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। 

तीन बंदरों के जरिए प्रदेश नेतृत्व पर निशाना

पालीवाल ने अपने विरोध प्रदर्शन के लिए गांधीजी के प्रसिद्ध तीन बंदरों को प्रतीक बनाया। उन्होंने तीनों को ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो’ के संदेश से जोड़ते हुए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। पालीवाल का कहना है कि वह लगातार सिंबल विवाद को लेकर अपनी बात उठा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित ध्यान और कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने गांधी जयंती को सत्य और अहिंसा के जरिए अपनी बात रखने का अवसर बताते हुए इसी तरीके से विरोध दर्ज कराया। उन्होंने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और इसके बाद तीन बंदरों के साथ जिला कांग्रेस कार्यालय की ओर पैदल मार्च किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भीलवाड़ा के पार्टी पदाधिकारियों को सद्बुद्धि मिलने की प्रार्थना भी की। 

17 प्रत्याशियों के सिंबल को लेकर क्या है विवाद?

भीलवाड़ा नगर निगम में कुल 70 वार्ड हैं। नगर निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों के अधिकृत चुनाव चिह्न से जुड़े दस्तावेज समय पर निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंच गए थे, जबकि 17 प्रत्याशियों के अथॉरिटी लेटर निर्धारित समय सीमा में नहीं पहुंच सके। इसके चलते इन प्रत्याशियों को कांग्रेस का अधिकृत चुनाव चिह्न नहीं मिल पाया। 

इसी मामले को लेकर मनोज पालीवाल लगातार संगठन के भीतर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकृत उम्मीदवारों के चुनाव चिह्न से जुड़े दस्तावेज समय पर निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाना संगठन की जिम्मेदारी थी और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।पालीवाल ने इससे पहले भी इस प्रकरण की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तक भी अपनी शिकायत पहुंचाने की बात कही थी। 

महापौर चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल

पालीवाल ने सिंबल विवाद को केवल पार्षद पद के उम्मीदवारों तक सीमित नहीं माना है। उनका आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर महापौर पद की दावेदारी पर भी पड़ा और कांग्रेस की ओर से महापौर पद के लिए अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल भी समय पर नहीं पहुंच पाया।इस मुद्दे को लेकर वह प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम जिम्मेदारी किसकी थी, यह संगठनात्मक जांच या संबंधित प्रक्रिया के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पहले चरखा लेकर भी कर चुके हैं प्रदर्शन

17 प्रत्याशियों के सिंबल विवाद को लेकर मनोज पालीवाल इससे पहले भी अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज करा चुके हैं। सितंबर के अंत में उन्होंने जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर चरखा लेकर धरना दिया था और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के इस्तीफे की मांग की थी। पालीवाल लगातार इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 17 प्रत्याशियों को अधिकृत सिंबल नहीं मिलने का असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ा।

‘यह अनुशासनहीनता नहीं, कार्यकर्ता की आवाज’

अपने प्रदर्शन को लेकर पालीवाल ने कहा कि उन्होंने किसी तरह की अनुशासनहीनता नहीं की है। उनके मुताबिक कांग्रेस में कार्यकर्ताओं को संगठन के भीतर अपनी बात रखने का अधिकार है और वह इसी अधिकार के तहत अपनी शिकायत उठा रहे हैं। उन्होंने गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों को अपने विरोध से जोड़ते हुए कहा कि वह पार्टी के भीतर उठे सवालों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में 17 कांग्रेस प्रत्याशियों के सिंबल से शुरू हुआ यह विवाद अब चुनाव के बाद भी पार्टी के भीतर राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पालीवाल लगातार प्रदेश नेतृत्व से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जबकि इस पूरे मामले में अंतिम संगठनात्मक कार्रवाई और जिम्मेदारी का फैसला कांग्रेस नेतृत्व की जांच और निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

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