Asian Games 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम ने मेडल किया पक्का, गोल्ड मेडल के लिए फाइनल में होगा चीन से मुकाबला

खबर सार :-

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने सेमीफाइनल में साउथ कोरिया को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने 44 साल बाद महिला हॉकी में गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीदें बरकरार रखी हैं।
साउथ कोरिया को 2-0 से हराकर फाइनल में पहुंची भारतीय महिला हॉकी टीम

खबर विस्तार : -

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम गोल्ड मेडल जीतने के बेहद करीब पहुंच गई है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में मेडल पक्का कर लिया है। बुधवार को जापान के काकामिगहारा में खेले गए सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया पर शानदार जीत दर्ज की। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-0 से हराया। फाइनल में भारतीय टीम का मुकाबला चीन से होगा। 

एशियन गेम्स गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश कर रही भारतीय टीम 

1982 के बाद से महिला हॉकी में अपना पहला एशियन गेम्स गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश कर रही भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में अपना शानदार रिकॉर्ड बनाए रखा। सलीमा टेटे की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने ज्यादातर समय बॉल पर कब्जा बनाए रखा, लेकिन साउथ कोरिया के मजबूत डिफेंस के कारण उन्हें गोल करने के लिए तीसरे क्वार्टर तक इंतजार करना पड़ा। भारत को पहले क्वार्टर में कई पेनाल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन किसी भी मौके को गोल में तब्दील नहीं किया जा सका। वे ओपन प्ले से भी गोल के करीब पहुंचे, लेकिन नवनीत कौर से मिले बेहतरीन पास के बाद लालरेम्सियामी हमारजोटे गोल नहीं कर पाईं। साउथ कोरिया ने भी दोनों तरफ से अटैक करके भारतीय डिफेंस को परखने की कोशिश की, लेकिन भारत का डिफेंस मजबूत बना रहा और पहला क्वार्टर बिना किसी गोल के खत्म हुआ।

44वें मिनट में इशिका ने भारत के लिए किया शानदार गोल

भारत ने दूसरे क्वार्टर में भी दबाव बनाए रखा और पेनाल्टी कॉर्नर से फिर गोल के करीब पहुंचा। नवनीत ने जबरदस्त शॉट लगाया, लेकिन साउथ कोरियाई गोलकीपर ने गोल के सामने डाइव लगाकर शानदार बचाव किया। भारत के लगातार दबाव के बावजूद दक्षिण कोरिया डटा रहा और हाफ-टाइम तक स्कोर 0-0 रहा। पाला बदलने के बाद भी भारत ने बॉल पर कब्जा बनाए रखा। मिडफील्ड से धैर्यपूर्वक अटैक किए और दोनों तरफ से मौके तलाशता रहा। हालांकि, साउथ कोरिया का डिफेंस भारतीय फॉरवर्ड्स को परेशान करता रहा। आखिरकार 44वें मिनट में सफलता मिली, जब इशिका ने शानदार फिनिश के साथ गोल किया और तीसरे क्वार्टर के अंत में भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई।

आखिरी क्वार्टर की शुरुआत में भारत ने बढ़त को कर दिया दोगुना 

इसके बाद भारत ने आखिरी क्वार्टर की शुरुआत में अपनी बढ़त को दोगुना कर दिया, जिसकी शुरुआत कप्तान सलीमा टेटे के एक बेहतरीन मूव से हुई थी। कप्तान ने दाईं ओर से गेंद को शूटिंग सर्कल में पहुंचाया और बेसलाइन से उसे पीछे की ओर मोड़ा। गेंद कोरियाई डिफेंडर की स्टिक से टकराकर दिशा बदलकर नेट में चली गई। साउथ कोरिया ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारत ने संयम बनाए रखा और दबाव बनाना जारी रखा। कोरियाई खिलाड़ियों ने दृढ़ता के साथ भारत के एक और पेनाल्टी कॉर्नर का बचाव किया, जिससे स्कोर 2-0 पर ही बना रहा।

क्या हॉकी में दूसरा स्वर्ण पदक जीतने का खत्म होगा 44 साल का इंतजार 

इस नतीजे ने एशियन गेम्स में महिलाओं की हॉकी में दूसरा स्वर्ण पदक जीतने के भारत के 44 साल के इंतजार को खत्म करने की उम्मीद को जिंदा रखा है। भारत पूल चरण में उज्बेकिस्तान को 19-0, इंडोनेशिया को 17-1 और थाईलैंड को 20-1 से हराने के साथ-साथ मेजबान जापान को 3-1 और सिंगापुर को 7-0 से मात देकर बिना कोई मैच हारे सेमीफाइनल में पहुंचा था। पूल-ए में दूसरे स्थान पर रही दक्षिण कोरियाई टीम ने बुधवार के सेमीफाइनल से पहले अपने पांच में से चार मैच जीते थे; उन्हें एकमात्र हार चीन के खिलाफ मिली थी। अब भारतीय टीम शुक्रवार को फाइनल में चीन का सामना करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान को सफल बनाने की कोशिश करेगी।

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ग्रीको-रोमन रेसलिंग में सुनील कुमार ने जीता ब्रॉन्ज मेडल 

एशियन गेम्स 2026 में बुधवार को सुनील कुमार ने पुरुषों के 87 किलोग्राम ग्रीको-रोमन रेसलिंग इवेंट में फिलीपींस के कैलम जॉनस्टन रॉबर्ट्स के खिलाफ 'टेक्निकल सुपीरियरिटी' के आधार पर 9-0 से जीत हासिल की। इसी के साथ सुनील ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया। सुनील ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम करते हुए रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज करवा लिया है। 27 वर्षीय सुनील एशियन गेम्स में दो ग्रीको-रोमन रेसलिंग मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बन गए हैं। 
हांगझोऊ 2022 में इसी कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद पोडियम पर वापसी करते हुए, सुनील को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में मुकाबला जीतने के लिए मुश्किल से एक राउंड की जरूरत पड़ी। उन्होंने तुरंत मैच पर पकड़ बना ली और शुरुआती दांव-पेच में रॉबर्ट्स को दो बार पटखनी देकर चार प्वाइंट्स हासिल किए। इसके बाद प्रतिद्वंद्वी की निष्क्रियता (पैसिविटी) के कारण उन्हें एक और प्वाइंट्स मिला, जिससे मुकाबले के शुरू होने के 90 सेकंड के भीतर ही भारतीय खिलाड़ी को 5-0 की बढ़त मिल गई।

कॉन्टिनेंटल गेम्स में एक से ज्यादा ग्रीको-रोमन मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बनें सुनील 

सुनील ने ढील देने का कोई संकेत नहीं दिखाया। उन्होंने एक और 'पैसिविटी' स्थिति का फायदा उठाते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को नीचे गिराकर बढ़त को 7-0 कर दिया, जिससे रॉबर्ट्स भारतीय खिलाड़ी के लगातार हमलों का जवाब खोजने के लिए संघर्ष करते दिखे। इसके कुछ ही देर बाद मुकाबला खत्म हो गया। सुनील ने एक और स्कोरिंग मूव करते हुए दो और प्वाइंट्स हासिल किए और 'टेक्निकल सुपीरियरिटी' के लिए जरूरी नौ प्वाइंट्स के अंतर तक पहुंच गए, जिससे मुकाबले का शानदार अंत हुआ। यह ब्रॉन्ज मेडल उनके करियर में एक और अध्याय जोड़ता है, जिसमें पहले से ही छह एशियन चैंपियनशिप मेडल शामिल हैं। अब सुनील कॉन्टिनेंटल गेम्स में एक से ज्यादा ग्रीको-रोमन मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। पोडियम पर उनकी यह हालिया सफलता ग्रीको-रोमन रेसलिंग मेडल टैली में भारत की मौजूदगी को बनाए रखती है। ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के बाद सुनील एशियन गेम्स के मंच पर सफलता हासिल करने वाले नवीनतम भारतीय एथलीट बन गए हैं।

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