TMC Political Crisis : TMC में ऐतिहासिक दो-फाड़, क्या लोकसभा में बदल जाएगी 'असली TMC' की परिभाषा?

खबर सार :-
TMC Political Crisis : दिल्ली में ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका! तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर NDA को समर्थन देने का किया ऐलान। अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष दस्तीदार को नेता बनाने की तैयारी। पढ़ें इस महा-विभाजन की पूरी इनसाइड स्टोरी।
TMC Political Crisis : TMC में ऐतिहासिक दो-फाड़, क्या लोकसभा में बदल जाएगी 'असली TMC' की परिभाषा?
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली / कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ऐसा भूचाल आ चुका है, जिसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख दिया है। 'इंडिया' ब्लॉक (INDIA Alliance) की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने देश की राजधानी दिल्ली पहुंचीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी ही पार्टी में एक ऐतिहासिक और बेहद व्यापक फूट (Internal Rift) का सामना करना पड़ रहा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के एक बहुत बड़े धड़े ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए पार्टी से नाता तोड़ लिया है और केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इस अप्रत्याशित TMC Political Crisis ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।

तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों का बागी गुट सक्रिय

प्राप्त विवरण के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों का यह बागी गुट अब संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की जगह वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को अपना नया नेता चुनना चाहता है। इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी का संसदीय दल के नेता का पद छीनने की पूरी पटकथा तैयार की जा चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर कोलकाता से शुरू हुई यह आंतरिक कलह और बगावत अब दिल्ली के शक्ति केंद्र तक पूरी तरह से पैर पसार चुकी है। कोलकाता में पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों का एक बड़ा गुट अपनी अलग राह चुन चुका है, और अब ठीक उसी तर्ज पर सांसदों ने भी अपनी ही सुप्रीम लीडर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को इस राजनीतिक ड्रामे का चरम तब देखने को मिला जब टीएमसी के 14 लोकसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर जाकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से एक गुप्त और लंबी मुलाकात की। इस बैठक के बाद यह साफ हो गया कि ममता बनर्जी का किला भीतर से पूरी तरह ढह चुका है। इस बड़े उलटफेर के बाद उभरे TMC Political Crisis ने ममता बनर्जी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को करारा झटका दिया है।

20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए का साथ देने का मन बनाया

पार्टी की बेहद सीनियर सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बात करते हुए खुले तौर पर यह दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए (NDA) का साथ देने का मन बना लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है। वर्तमान संसदीय गणित की बात करें तो लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत लोकसभा में किसी भी तरह के नए गुट को मान्यता दिलाने या कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 12 सांसदों (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता होती है। चूंकि बागी गुट के पास 20 सांसदों का मजबूत समर्थन होने का दावा है, इसलिए यह विभाजन पूरी तरह से कानूनी रूप लेता दिख रहा है। इस कानूनी और राजनीतिक पेच ने TMC Political Crisis को और अधिक गंभीर बना दिया है।

TMC Political Crisis पार्टी के वजूद के लिए खतरा

काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "स्पीकर ओम बिरला को हमारे गुट की ओर से पत्र भेजा जा चुका है। मेरे सहित टीएमसी के लगभग 20 सांसदों ने विकास के एजेंडे को देखते हुए एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।" उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा में वे अभी भी पार्टी की आधिकारिक मुख्य सचेतक (Chief Whip) हैं और यह निर्णय सभी साथी सांसदों के साथ गहन विमर्श के बाद सामूहिक रूप से लिया गया है। बागी सांसदों का तर्क है कि ममता बनर्जी द्वारा संसद में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित करने के समय से ही जो असंतोष पनपा था, वह अब फूट पड़ा है। कोलकाता में जिस तरह लगभग 60 विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता माना था और विधानसभा अध्यक्ष ने उसे 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता दी थी, ठीक वही फॉर्मूला अब दिल्ली में भी अपनाया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के कारण पैदा हुआ TMC Political Crisis पार्टी के वजूद के लिए खतरा बन गया है।

हम टीएमसी में फैले चौतरफा भ्रष्टाचार से तंग : डॉ. शर्मिला सरकार

बागी धड़े की एक और प्रमुख सांसद डॉ. शर्मिला सरकार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "हम टीएमसी में फैले चौतरफा भ्रष्टाचार (Corruption) से पूरी तरह तंग आ चुके हैं। मैं देश और राज्य के विकास का हिस्सा बनना चाहती हूं। हमने आज मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। हम काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में एक अलग गुट के तौर पर काम करेंगे।" डॉ. सरकार ने यह भी दर्द बयां किया कि पार्टी के भीतर पुराने और निष्ठावान नेताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था और आंतरिक कलह चरम पर थी। उन्होंने चुनाव के दौरान काम न करने वाले नेताओं की एक गुप्त रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को भेजी थी, लेकिन उस पर कार्रवाई करने के बजाय वह रिपोर्ट उल्टे उन्हीं भ्रष्ट नेताओं के पास लीक कर दी गई। ऐसे आंतरिक विश्वासघातों के चलते ही इस TMC Political Crisis ने जन्म लिया है।

सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी में किसी भी बड़ी टूट से इनकार किया

काकोली घोष दस्तीदार, जो कि बारासात से सांसद हैं, ने मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कल्याण बनर्जी जैसे नेताओं पर महिलाओं के प्रति अभद्र और गलत व्यवहार करने के भी आरोप लगाए हैं। इस बीच, ममता बनर्जी के वफादार गुट के सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी में किसी भी तरह की बड़ी टूट से साफ इनकार किया है। कीर्ति आजाद का दावा है कि बागी सांसदों की वास्तविक संख्या 20 नहीं बल्कि सिर्फ 13 है। हालांकि, संख्या बल चाहे जो भी हो, इस तीखे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि TMC Political Crisis अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां से पार्टी को एकजुट रख पाना ममता बनर्जी के लिए नामुमकिन नजर आ रहा है।

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