सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव! बढ़ेगी जजों की संख्या, जल्द ही देश को मिलेगी पहली महिला CJI

खबर सार :-

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक न्यायिक सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य लंबित मामलों को कम करना और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। वहीं पहली महिला प्रधान न्यायाधीश को लेकर दिया गया बयान न्यायपालिका में महिला भागीदारी बढ़ने का संकेत देता है। नए बदलाव न्याय वितरण प्रणाली को नई गति दे सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, देश को मिलेगी पहली महिला CJI!

खबर विस्तार : -

Supreme Court Judges Bill 2026: भारत की न्याय व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में कहा कि देश जल्द ही पहली बार किसी महिला को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर देखेगा। उन्होंने लंबित मामलों के निपटारे और न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया।

उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर राज्यसभा में बुधवार को चर्चा हुई। लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को राज्यसभा में भी मंजूरी दे दी गई। चर्चा के दौरान केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य न्याय को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए सरकार न्यायपालिका के साथ मिलकर काम कर रही है। न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक और बेहतर आधारभूत ढांचे के माध्यम से आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे मामलों के निपटारे की गति बढ़ाई जा सके।

सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे 38 न्यायाधीश

अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पर जवाब देते हुए कहा कि जब 28 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब इसमें कुल 8 न्यायाधीश थे। इनमें एक प्रधान न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश शामिल थे। उन्होंने बताया कि विधेयक पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 न्यायाधीश होंगे। इससे पहले भी समय-समय पर न्यायिक जरूरतों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की गई है। मेघवाल के अनुसार, 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। तत्काल आवश्यकता को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश लाकर यह व्यवस्था लागू की गई थी।

पुराने मामलों के निपटारे के लिए बनेंगी विशेष पीठें

कानून मंत्री ने बताया कि अध्यादेश लागू होने के बाद 1 जून 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चार विशेष पीठों का गठन किया है। ये पीठें केवल पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी। इन्हें नियमित विविध मामलों की सुनवाई से अलग रखा गया है, ताकि लंबित पुराने मामलों का तेजी से समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के जरिए लागू प्रावधानों को स्थायी रूप देने के लिए ही उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन का विधेयक लाया गया है।

भारत को जल्द मिलेगी पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

महिला न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि भारत जल्द ही पहली बार एक महिला को देश के सर्वोच्च न्यायिक पद यानी प्रधान न्यायाधीश के पद पर देखेगा। उन्होंने कहा कि हाल के समय में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मेघालय और पटना उच्च न्यायालयों में महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नारी शक्ति को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर देते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट भवन विस्तार पर 795 करोड़ रुपये खर्च

मेघवाल ने न्यायिक बुनियादी ढांचे को लेकर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट भवन के विस्तार का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा दो चरणों में करीब 795.53 करोड़ रुपये की लागत से यह विस्तार कार्य कराया जा रहा है। इससे न्यायालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सरकार का पक्ष

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सहयोगात्मक प्रक्रिया के तहत होती है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124 और उच्च न्यायालयों में नियुक्तियां अनुच्छेद 217 और 224 के तहत की जाती हैं। मेघवाल ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 1993 के द्वितीय न्यायाधीश प्रकरण और 1998 के तृतीय न्यायाधीश प्रकरण के आधार पर तैयार मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार संचालित होती है।

न्याय व्यवस्था में बदलाव की नई शुरुआत

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में लंबित मामलों को कम करना न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार का दावा है कि नए न्यायाधीशों और आधुनिक सुविधाओं के जरिए न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सकेगा। वहीं, पहली महिला प्रधान न्यायाधीश को लेकर कानून मंत्री का बयान भारतीय न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में न्याय व्यवस्था में तकनीक, संसाधन और विविधता पर अधिक जोर देखने को मिल सकता है।

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FAQ.

1. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या कितनी बढ़ाई गई है?

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का फैसला लिया गया है। इसमें प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 न्यायाधीश होंगे।

2. क्या भारत को जल्द पहली महिला प्रधान न्यायाधीश (CJI) मिलेगी?

हां, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि देश जल्द ही पहली बार एक महिला को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर देखेगा।

3. जजों की संख्या बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना, न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाना और लोगों को जल्द न्याय उपलब्ध कराना है।

4. सुप्रीम कोर्ट में पुराने मामलों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?

पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार विशेष पीठों का गठन किया है, जो लंबित पुराने मामलों की सुनवाई करेंगी।

 

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