भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला, सुधांशु त्रिवेदी बोले– तुकाराम ओंबले न होते तो देश पर मढ़ दिया जाता 'हिंदू आतंकवाद' का झूठा कलंक
खबर सार :-
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मुंबई धमाकों की बरसी पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कसाब को जिंदा न पकड़ा जाता तो कांग्रेस देश पर 'हिंदू आतंकवाद' का झूठा नैरेटिव मढ़ देती। इसके साथ ही उन्होंने वायनाड संकट के समय राहुल और प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुंबई लोकल ट्रेन में हुए भीषण सिलसिलेवार बम धमाकों की बरसी के मौके पर तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार की नीतियों और नीयत पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया और राजनीतिक लाभ के लिए एक खास एजेंडे के तहत 'हिंदू आतंकवाद' (Hindu Terrorism) के झूठे नैरेटिव को गढ़ने की कोशिश की गई। इसके साथ ही, भाजपा सांसद ने केरल के वायनाड (Wayanad) में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के समय कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर भी गांधी परिवार पर तीखा तंज कसा।
वायनाड संकट पर गांधी परिवार पर साधा निशाना
सुधांशु त्रिवेदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अपनी पारंपरिक सीट खोने के बाद राहुल गांधी ने वायनाड (Wayanad) का रुख किया था। वहां की जनता ने संकट के समय उनका साथ दिया। लोकसभा चुनाव के बाद जब उन्होंने यह सीट छोड़ी, तो वादा किया था कि वायनाड को अब दो-दो सांसद मिलेंगे। त्रिवेदी ने कहा, "आज जब वायनाड के लोग मूसलाधार बारिश और जानलेवा भूस्खलन (Landslide) की भीषण विभीषिका से जूझ रहे हैं, तब दोनों ही नेता धरातल से गायब हैं। केरलम की जनता यह जानने का हक रखती है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि इस परीक्षा की घड़ी में दुनिया के किस कोने में छिपे हैं।" उन्होंने इसे वायनाड के नागरिकों के साथ एक क्रूर मजाक बताते हुए कहा कि इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए गांधी परिवार को जनता से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
26/11 और मुंबई धमाकों को लेकर खड़े किए तीखे सवाल
वर्ष 2006 में मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में हुए बम धमाकों का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े कई पुराने घाव आज फिर हरे हो गए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्कालीन उपसचिव आर.वी.एस. मणि के बयानों का हवाला देते हुए कांग्रेस को घेरा। त्रिवेदी ने कहा कि अगर 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के दौरान मुंबई पुलिस के वीर जवान तुकाराम ओंबले (Tukaram Omble) ने अपनी जान पर खेलकर पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को जिंदा नहीं दबोचा होता, तो देश के सामने सच्चाई कभी नहीं आ पाती।उन्होंने दावा किया कि हमले में शामिल सभी आतंकियों के पास फर्जी हिंदू पहचान पत्र (Fake Hindu Identity Cards) थे और उनके हाथों में कलावा बंधा हुआ था। यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था, ताकि पूरे हमले का दोष हिंदुओं के मथे मढ़कर 'हिंदू आतंकवाद' (Hindu Terrorism) की थ्योरी को सच साबित किया जा सके।
गोपनीयता और फाइलों के गायब होने पर उठाए सवाल
भाजपा नेता ने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने खुद संसद में स्वीकार किया था कि नौसेना को कुछ संदिग्ध इनपुट मिले थे, लेकिन उन पर आगे कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया गया। त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि दिग्विजय सिंह, जो उस समय सरकार के किसी संवैधानिक पद पर नहीं थे, देश की संवेदनशील और अत्यंत गोपनीय खुफिया जानकारियों (Secret Intelligence Inputs) तक कैसे पहुँच बना रहे थे? उन्होंने इशरत जहां मामले का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए सरकारी हलफनामों तक को बदल दिया गया। जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई, तो इस हेरफेर से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें ही गायब मिलीं।
'क्या कांग्रेस और आईएसआई के बीच कोई मैच फिक्सिंग थी?'
सुधांशु त्रिवेदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब का संदर्भ देते हुए कहा कि 2010 की भारत यात्रा और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बातचीत से स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई (Military Action) के लिए पूरी तरह तैयार थी। इसके बावजूद तत्कालीन सरकार ने सेना के हाथ बांधकर रखे और कोई कड़ा कदम नहीं उठाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस से सीधा और तीखा सवाल दागते हुए पूछा, "क्या उस दौर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और कांग्रेस पार्टी के बीच कोई आपसी तालमेल या मैच फिक्सिंग थी, जिसके कारण पाकिस्तानी आतंकियों और उनके आकाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से लगातार परहेज किया गया?"
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