गोरक्षा कानून और राम मंदिर प्रबंधन को लेकर शंकराचार्य का केंद्र पर निशाना, बोले- देना होगा जवाब

खबर सार :-

अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े विवादों पर भी शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि पूरी व्यवस्था या टीम में कोई समस्या है तो केवल किसी एक व्यक्ति या एक हिस्से को बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
गोरक्षा कानून और राम मंदिर प्रबंधन को लेकर शंकराचार्य का केंद्र पर निशाना, बोले- देना होगा जवाब

खबर विस्तार : -

अयोध्या: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को देश में गोरक्षा कानून नहीं बनने और अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब हिंदू समाज को उन राजनीतिक दलों से जवाब मांगना चाहिए, जो वर्षों से गाय संरक्षण के नाम पर राजनीति करते रहे हैं, लेकिन ठोस कानून बनाने में असफल रहे।

शंकराचार्य ने कहा कि गाय की रक्षा करना सनातन परंपरा में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी गई है। उन्होंने कहा कि भारत में करोड़ों हिंदू गाय को माता का दर्जा देते हैं, लेकिन इसके बावजूद देश में गोहत्या और गोवंश की बिक्री से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आजादी के दशकों बाद भी गोरक्षा को लेकर कोई ऐसा केंद्रीय कानून नहीं बनाया गया, जिसकी लंबे समय से मांग की जाती रही है।

उन्होंने कहा कि आजादी से पहले सनातन समाज से यह अपेक्षा जताई गई थी कि स्वतंत्र भारत में गायों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। लेकिन उनके अनुसार, आजादी के 78 साल बाद भी यह मुद्दा पूरी तरह हल नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि देश के कानून में गाय को अभी भी एक सामान्य पशु के रूप में देखा जाता है, जबकि हिंदू समाज में उसे धार्मिक और भावनात्मक रूप से माता का स्थान प्राप्त है।

राजनीतिक दलों को दिया 6-8 महीने का समय

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर विचार करने के लिए 6 से 8 महीने का समय दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दल गाय के नाम पर केवल प्रतीकात्मक राजनीति करते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ दल गाय को गुड़-चना खिलाने और तस्वीरें खिंचवाने तक सीमित रहते हैं, लेकिन जब वास्तविक स्थिति और आंकड़ों पर नजर डाली जाती है तो अलग तस्वीर सामने आती है। उन्होंने राजनीतिक दलों से स्पष्ट नीति और कानून बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में चुनाव और वोट का विशेष महत्व है। इसलिए अब वह लोगों से अपील करेंगे कि वे उसी राजनीतिक दल को समर्थन दें, जो गोरक्षा को लेकर स्पष्ट गारंटी और ठोस कदम उठाने का भरोसा दे।

भाजपा और केंद्र सरकार पर साधा निशाना

शंकराचार्य ने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहने वाले दलों से जनता की उम्मीद सबसे अधिक होती है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान गोरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए थे और इसी उम्मीद के साथ लोगों ने भाजपा को लगातार समर्थन दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले 12 वर्षों में तीन बार सरकार बनने के बाद भी गोरक्षा को लेकर स्थिति में कितना बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल नारों और वादों से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि वह ठोस कार्रवाई चाहती है।

उन्होंने कहा कि पहले चुनावों के दौरान “नरेंद्र मोदी को वोट मत दो, गोमाता को जीवन दो” जैसे नारे भी सामने आए थे। लेकिन अब समय आ गया है कि राजनीतिक दल अपने पुराने वादों और वर्तमान स्थिति पर जवाब दें।

अयोध्या में गोरक्षा को लेकर अभियान की बात

शंकराचार्य ने बताया कि वह इस समय अयोध्या में हैं और यहां गाय संरक्षण से जुड़े लोगों से बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को गोरक्षा के मुद्दे पर जागरूक किया जाएगा और उनसे ऐसे राजनीतिक विकल्प चुनने की अपील की जाएगी, जो इस विषय पर गंभीरता से काम करें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के पास अभी समय है कि वे गोरक्षा को लेकर अपनी नीतियों पर विचार करें और स्पष्ट कदम उठाएं।

राम मंदिर प्रबंधन पर भी उठाए सवाल

उन्होंने व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि किसी भी संस्थान की मजबूती उसके पूरे तंत्र की पारदर्शिता और जिम्मेदारी से होती है। शंकराचार्य के बयानों के बाद गोरक्षा और मंदिर प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। उनके समर्थकों का कहना है कि वह लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं, जबकि राजनीतिक दलों की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।

यह भी पढ़ेंः-संजय राउत का बड़ा दावा, बोले- केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो महाराष्ट्र की राजनीति में आएगा बड़ा बदलाव

अन्य प्रमुख खबरें