‘सोनम वांगचुक को दें शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी’, जंतर-मंतर में बोले अरविंद केजरीवाल
खबर सार :-
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने शिक्षा सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की। केजरीवाल ने सरकार से युवाओं की आवाज सुनने और परीक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए प्रभावी उपाय करने की अपील की।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है, क्योंकि बार-बार होने वाले पेपर लीक युवाओं का भरोसा कम कर रहे हैं।
छात्रों के भविष्य के लिए लड़ रहे
शिक्षा सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों और सोनम वांगचुक को सलाम करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वे अपने लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षा देने वाला छात्र सिर्फ टेस्ट देने नहीं जाता; वह अपने सपनों को पूरा करने की उम्मीद लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचता है।
युवाओं के मनोबल पर पड़ रहा बुरा असर
उन्होंने कहा कि छात्र यह मानकर परीक्षा देते हैं कि उनका भविष्य उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से बनेगा, लेकिन लगातार हो रहे पेपर लीक इस भरोसे को कम कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताया और कहा कि इसका देश के युवाओं के मनोबल पर बुरा असर पड़ रहा है।
ठोस कदम उठाने में नाकाम रही सरकार
केजरीवाल ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हालांकि जांच, FIR और गिरफ्तारी की बातें हमेशा होती हैं, लेकिन अंत में आरोपी जमानत पा जाते हैं और अगले साल फिर वैसी ही घटनाएं होती हैं। उन्होंने दावा किया कि NEET विवाद के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली, फिर भी सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए ठोस कदम उठाने में नाकाम रही।
युवाओं की आवाज सुनने की अपील
केजरीवाल ने सरकार से युवाओं की आवाज सुनने और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने के लिए प्रभावी उपाय करने का आग्रह किया। अपने संबोधन में केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और कहा कि शिक्षा प्रणाली को बदलने के लिए क्रांतिकारी सोच की जरूरत है।
अन्ना हजारे के आंदोलन का जिक्र
2011 के अन्ना हजारे के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस समय की सरकार ने जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया और बाद में सत्ता से बाहर हो गई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार युवाओं की मांगों और शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो उसे राजनीतिक नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा सुधार की जिम्मेदारी सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति को सौंपी जानी चाहिए।
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