Pune Liquor Case: चार और पुलिसकर्मी निलंबित, अब तक 18 लोगों की मौत
खबर सार :-
महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब मामले में अब तक कुल 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीण पुलिस मुख्यालय ने चार और पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं अन्य लोगों को इलाज जारी है।
खबर विस्तार : -
पूणेः महाराष्ट्र के पुणे जिले में जहरीली देशी शराब पीने से हुई मौतों के मामले में पुलिस विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को पुणे ग्रामीण पुलिस मुख्यालय ने चार और पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही इस मामले में निलंबित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। इससे पहले 12 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी थी। वहीं विभागीय स्तर पर अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
कई अन्य लोगों का इलाज जारी
जहरीली शराब कांड ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच फिलहाल राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) की टीम कर रही है।
चार पुलिसकर्मी निलंबित
सूत्रों के अनुसार, पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने अवैध रूप से बेची जा रही जहरीली देशी शराब के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं करने और संदिग्ध गतिविधियों में लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। निलंबित किए गए कर्मचारियों में दौंड डिप्टी सुपरिटेंडेंट कार्यालय के सुभाष दोईफोडे, उरुली कंचन पुलिस स्टेशन के पुलिस कांस्टेबल अजीत शिवाजी काले तथा यवत पुलिस स्टेशन के पुलिस कांस्टेबल सुमित नंदकुमार वाघ और रामदास ज्ञानदेव जगताप शामिल हैं।
आरोपी के संपर्क में थे पुलिसकर्मी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब मामले का मुख्य आरोपी राधेश्याम प्रजापति उरुली कंचन क्षेत्र का निवासी है। जांच एजेंसियों को मिले कुछ इनपुट और साक्ष्यों से संकेत मिला है कि आरोपी के इन पुलिस कर्मचारियों से संपर्क थे। इसी आधार पर उनके आचरण और भूमिका की जांच की गई।
बारामती डिवीजन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित पुलिसकर्मियों का व्यवहार पुलिस बल की अनुशासनात्मक व्यवस्था के लिए हानिकारक और अत्यंत संदिग्ध प्रतीत होता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों की गतिविधियों की गहन जांच आवश्यक है। इसी रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और महाराष्ट्र पुलिस नियमों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
सख्त कार्रवाई का भरोसा
पुलिस विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि जांच प्रक्रिया किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो। गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए निलंबित कर्मचारियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुणे ग्रामीण पुलिस मुख्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति के मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
इसके अलावा सभी निलंबित कर्मचारियों को प्रतिदिन दो बार, सुबह और शाम, पुलिस मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से जांच की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी भी प्रकार की बाहरी हस्तक्षेप की संभावना कम होगी।
उल्लेखनीय है कि जहरीली शराब कांड को लेकर राज्यभर में चिंता का माहौल है। घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के कारोबार और उस पर निगरानी रखने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीआईडी की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
यह भी पढ़ेंः-पुणे में जहरीली शराब का कहर: एक ही परिवार के तीन लोगों समेत 12 की मौत, सीएम फडणवीस ने दिए कड़ी कार्रवाई के आदेश
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