Ram Mandir Chori : राम मंदिर चंदे में 'डाका' पर ओवैसी का सबसे बड़ा धमाका, पूछा- अब यूपी पुलिस पैर पर गोली मारेगी या घर पर चलेगा बुलडोजर?
खबर सार :-
Ram Mandir Chori : राम मंदिर चंदे में हुई कथित चोरी (Ram Mandir Chori) पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने पूछा कि क्या इन आरोपियों के घरों पर भी बुलडोजर चलेगा या पैर में गोली मारी जाएगी? जानिए वीएचपी और ओवैसी के बयानों से गरमाई यूपी की राजनीति की पूरी रिपोर्ट।
खबर विस्तार : -
Ram Mandir Chori : अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अब उसके दान और चंदे को लेकर एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। राम मंदिर में कथित तौर पर चंदे की चोरी (Ram Mandir Chori) का मामला सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने बेहद तीखा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि इस महाघोटाले और चोरी के आरोपियों के खिलाफ आखिर सख्त कानूनी कार्रवाई (Legal Action) क्यों नहीं की जा रही है?
चोरी के खुलासे के बाद SIT की एंट्री और ट्रस्ट का बड़ा फैसला
इस पूरे विवाद (Controversy) की शुरुआत तब हुई जब राम मंदिर के चंदे में कथित तौर पर बड़ी हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, पूरे देश में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच के बाद कई कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है, जिसे मंदिर ट्रस्ट ने स्वीकार भी कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस मामले में मुख्य रूप से संलिप्त 6 लोगों के खिलाफ जल्द ही नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने वाली है। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन में एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) की नियुक्ति पर भी सहमति बन गई है।
योगी सरकार की बुलडोजर नीति पर ओवैसी का तीखा तंज
लेकिन इस प्रशासनिक हलचल के बीच असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के बयानों ने इस पूरे मामले को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया है। हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार की 'बुलडोजर नीति' और एनकाउंटर संस्कृति पर जोरदार तंज कसा। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, "मुझे नहीं पता कि इस देश में क्या हो रहा है, लेकिन हम सब तो बस इसी इंतजार में बैठे हैं कि इस मामले में पहली एफआईआर (FIR) कब दर्ज की जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद सरकार किसका घर तोड़ेगी? क्या इन चोरों के घरों पर भी बुलडोजर चलाया जाएगा या फिर इन्हें छोड़ दिया जाएगा?"
'रूल बाय लॉ' बनाम 'रूल बाय गन': ओवैसी ने उठाए गंभीर सवाल
ओवैसी यहीं नहीं रुके, उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे अपराधियों के एनकाउंटर की नीति पर हमला बोला। उन्होंने पूछा, "क्या इस बार भी उत्तर प्रदेश में स्थापित हो चुकी नई परंपरा के तहत आरोपियों के पैर पर गोली मारी जाएगी या फिर उनके आशियाने जमींदोज किए जाएंगे? आस्था की बुनियाद (Foundation of Faith) पर इस देश में बहुत कुछ बदल दिया गया। जब आस्था के नाम पर सब कुछ जायज ठहराया जा सकता है, तो क्या आस्था की आड़ में की गई यह इतनी बड़ी चोरी (Ram Mandir Chori) भी बर्दाश्त कर ली जाएगी? अब यह पूरी तरह से केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार को तय करना है कि वह अपराधियों के साथ क्या सुलूक करती है।"
भेदभाव का आरोप: 'कार्रवाई में सरकार के हाथ क्यों कांप रहे हैं?'
अपने बयानों में ओवैसी ने भेदभाव का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज के समय में यूपी 'रूल बाय लॉ' यानी कानून के शासन से नहीं, बल्कि 'रूल बाय गन' यानी बंदूक के दम पर चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना बेहद आसान काम हो गया है। सड़क पर नमाज पढ़ने से लेकर धार्मिक यात्राओं (Religious Processions) के दौरान जबरन दुकानें बंद कराने तक, हर जगह एकतरफा कार्रवाई देखने को मिलती है। ऐसे में ओवैसी का सीधा सवाल है कि जब बात बहुसंख्यक समाज की आस्था से जुड़े राम मंदिर में चोरी (Ram Mandir Chori) की है, तो सरकार के हाथ क्यों कांप रहे हैं और कार्रवाई करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है?
विहिप भी मैदान में: वीएचपी अध्यक्ष ने की बिना दबाव निष्पक्ष जांच की मांग
दूसरी तरफ, दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर केवल विपक्ष ही हमलावर नहीं है, बल्कि दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस चोरी पर अपनी गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया है। वीएचपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस पूरी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक करार दिया है। आलोक कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि मंदिर के पैसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म होनी चाहिए और एक अचूक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने माना कि कुछ लोगों को जरूरत से ज्यादा छूट दी गई थी, जिसका फायदा उठाकर उन्होंने इस पवित्र धन की चोरी (Ram Mandir Chori) की। वीएचपी अध्यक्ष ने भी बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के पुलिस से तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर सभी दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की पुरजोर मांग की है।
भविष्य की राह: फाइलें दफन होंगी या गुनहगारों को मिलेगी सजा?
अब देखना यह होगा कि इस भारी राजनीतिक दबाव और जनभावनाओं के बीच उत्तर प्रदेश प्रशासन और राम मंदिर ट्रस्ट इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या ओवैसी के तीखे सवालों का जवाब देने के लिए सरकार इस मामले में भी वही कड़ा रुख अपनाएगी जो वह अन्य अपराधियों के खिलाफ अपनाती रही है, या फिर यह मामला सिर्फ फाइलों और कमेटियों के फेर में उलझकर रह जाएगा? फिलहाल, पूरा देश इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि पवित्र नगरी अयोध्या में आस्था के नाम पर सेंध लगाने वाले इन 6 सफेदपोश चोरों का हश्र क्या होता है।
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