डिजिटल अरेस्ट गैंग पर सीबीआई का देशव्यापी प्रहार, 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, फर्जी वेबसाइट और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

खबर सार :-

डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ सीबीआई का ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ साइबर अपराधियों पर बड़ी चोट माना जा रहा है। 16 राज्यों में एक साथ हुई छापेमारी ने इस संगठित नेटवर्क की गहराई को उजागर किया है। फर्जी वेबसाइट, शेल कंपनियां और मनी लॉन्ड्रिंग के खुलासे ने साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ाई हैं। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
डिजिटल अरेस्ट गैंग पर सीबीआई का देशव्यापी प्रहार, 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, फर्जी वेबसाइट और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

खबर विस्तार : -

Digital arrest scam: देशभर में तेजी से फैल रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत सीबीआई ने 16 राज्यों में फैले साइबर अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस व्यापक अभियान के लिए 60 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था, जिन्होंने एक समन्वित कार्रवाई के तहत कई राज्यों में एक साथ दबिश दी।

सीबीआई की यह कार्रवाई उन संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई है, जो ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे थे। जांच एजेंसी का कहना है कि यह नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था और इसके तार विदेशों तक जुड़े होने की आशंका है।

200 से अधिक मामलों की जांच से निकला बड़ा नेटवर्क

सीबीआई के अनुसार यह छापेमारी ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े 200 से अधिक मामलों की जांच का हिस्सा थी। जांच में सामने आया कि एक संगठित गिरोह लोगों को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर कॉल करता था और उन्हें कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का भय दिखाकर धन उगाही करता था। इन मामलों में पीड़ितों को वीडियो कॉल के जरिए घंटों तक ऑनलाइन रखा जाता था और उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे किसी जांच एजेंसी की निगरानी में हैं। इसी प्रक्रिया को अपराधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम देकर लोगों से बड़ी रकम वसूलते थे।

चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपी गिरफ्तार

अभियान के दौरान सीबीआई ने चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक ये आरोपी शेल कंपनियां बनाने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और म्यूल बैंक अकाउंट संचालित करने में शामिल थे। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध धन के लेन-देन और उसकी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों के माध्यम से करीब दो करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि को वैध दिखाने की कोशिश की गई थी। एजेंसी अब इन वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट जैसी फर्जी वेबसाइट बनाकर रचा गया था जाल

जांच के दौरान सीबीआई को एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य भी मिला। अपराधियों ने भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल वाली एक फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इस वेबसाइट का इस्तेमाल लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए किया जा रहा था कि उनके खिलाफ न्यायालय या जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने जब इस फर्जी वेबसाइट की शिकायत दर्ज कराई, तब सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि अपराधियों ने वेबसाइट पर नकली दस्तावेज और फर्जी आदेश अपलोड किए थे, जो देखने में पूरी तरह असली प्रतीत होते थे।

फर्जी आदेशों और नकली दस्तावेजों से बनाया भरोसे का माहौल

सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगों ने लोगों को भ्रमित करने के लिए अदालतों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आदेशों जैसे दिखने वाले नकली दस्तावेज तैयार किए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पीड़ितों को डराने और उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए किया जाता था। एडवांस्ड फॉरेंसिक तकनीकों और डिजिटल ट्रैकिंग की मदद से जांच एजेंसी ने इस नेटवर्क के कई महत्वपूर्ण लिंक और ऑपरेटर्स की पहचान की है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क अत्यधिक पेशेवर तरीके से संचालित किया जा रहा था।

छापेमारी में मिले अहम सबूत

देशभर में हुई कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के पूरे ढांचे का खुलासा किया जा सके। जांच एजेंसी को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि इस गिरोह ने केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं बल्कि कई विदेशी नागरिकों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। इस संबंध में संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी आवश्यक जानकारी भेजी जा रही है।

साइबर अपराध के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से होने वाली ठगी के खिलाफ उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। एजेंसी का लक्ष्य ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश साबित होगी।

अन्य प्रमुख खबरें