आपातकाल के 51 साल: देशभर में 'संविधान हत्या दिवस' मनाएगी भाजपा, कांग्रेस पर तीखा हमला

खबर सार :-

आपातकाल के 51 साल पूरे होने पर भाजपा देशभर में 'संविधान हत्या दिवस' मना रही है। बिहार के 90,000 बूथों पर आयोजन और जेपी सेनानियों का सम्मान होगा। जानिए कांग्रेस पर भाजपा नेताओं के तीखे हमलों की पूरी रिपोर्ट।
आपातकाल के 51 साल: देशभर में 'संविधान हत्या दिवस' मनाएगी भाजपा, कांग्रेस पर तीखा हमला

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश के लोकतांत्रिक इतिहास का वह काला अध्याय, जिसे याद कर आज भी पुरानी पीढ़ी सिहर उठती है, उसे पूरे 51 साल बीत चुके हैं। साल 1975 में आज ही के दिन यानी 25 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था। इस ऐतिहासिक तारीख की कसक और राजनीतिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार बेहद आक्रामक ढंग से मैदान में उतर रही है। पार्टी ने इस ऐतिहासिक और विवादित मोड़ को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके तहत देश के कोने-कोने में, खासकर विपक्ष शासित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में विशेष जागरूकता और विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है।

भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मानना है कि आज जो दल और नेता संसद से लेकर सड़क तक हाथ में संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं, उन्हें अपने अतीत के आईने में झांकना चाहिए। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ किया है कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि वह स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्यायपालिका और नागरिकों की बुनियादी स्वतंत्रताओं पर किया गया सबसे क्रूर और सुनियोजित प्रहार था। इसी संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए भाजपा ने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बड़े आयोजनों की तैयारी की है, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस दमनकारी दौर की हकीकत से रूबरू कराना है।

 बिहार के 90 हजार बूथों पर गूंजेगा आपातकाल का सच

राजनीतिक रूप से देश के सबसे जागरूक सूबे बिहार में इस बार का 'संविधान हत्या दिवस' अभूतपूर्व पैमाने पर आयोजित हो रहा है। जयप्रकाश नारायण की इस आंदोलन भूमि पर भाजपा ने अपने संगठन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। प्रदेश संगठन से मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार के करीब 90,000 पोलिंग बूथों पर विभिन्न स्तर के गोष्ठी, जनसंवाद और विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा का मानना है कि जेपी आंदोलन की धरती से उठी आवाज पूरे देश के राजनीतिक विमर्श को दिशा देती है, इसलिए बिहार में इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। पटना के ऐतिहासिक ज्ञान भवन में गुरुवार को एक भव्य और भावुक कर देने वाले सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा खुद शिरकत कर रहे हैं। वे यहां आपातकाल विरोधी आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहे लगभग 450 'जेपी सेनानियों' और 'लोकतंत्र सेनानियों' को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे। यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि उस दमन के खिलाफ लड़ने वाले नायकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है।

निजी सत्ता के लिए बंधक बना लिया गया था देश: भाजपा

इस बीच, पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संयुक्त और बेहद आक्रामक प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल तथा पवन जायसवाल ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया। दोनों नेताओं ने दोटूक शब्दों में आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के सभी बुनियादी और मौलिक अधिकारों को पूरी तरह निष्प्रभावी और सीमित कर दिया गया था।

नेताओं ने कहा कि सिर्फ एक परिवार और एक व्यक्ति की राजनीतिक सत्ता को बचाए रखने के लिए देश की तमाम सर्वोच्च संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की हरसंभव कोशिश की गई थी। न्यायपालिका के पर कतर दिए गए थे और नौकरशाही को पूरी तरह प्रतिबद्ध होने पर मजबूर किया गया था।

सप्ताह भर चलेगा अभियानों का सिलसिला, युवाओं को जोड़ने की कोशिश

भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के मूड में नहीं दिख रही है। पवन जायसवाल ने आगामी सांगठनिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 30 जून से लेकर 6 जुलाई तक बिहार के सभी 52 संगठनात्मक जिलों में विशाल कार्यकर्ता सम्मेलनों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसके समानांतर, नई पीढ़ी यानी युवाओं और महिलाओं को इस इतिहास से अवगत कराने के लिए भाजपा के युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष रणनीति बनाई गई है।

इसके तहत राज्य के पांच प्रमुख प्रशासनिक प्रमंडलों में विशाल छात्र सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, ताकि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को यह बताया जा सके कि किस तरह कांग्रेस शासनकाल में अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा गया था। पार्टी का मानना है कि आज के युवाओं को यह जानना जरूरी है कि वर्तमान लोकतंत्र को पाने के लिए बुजुर्गों ने कितनी बड़ी कीमत चुकाई है।

 हरियाणा में भी कांग्रेस को आत्ममंथन करने की कड़ी नसीहत

बिहार के साथ-साथ हरियाणा में भी भाजपा का रुख बेहद हमलावर है। सूबे के वरिष्ठ नेताओं ने सर्वसम्मति से आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे अंधकारमय और शर्मनाक दौरों में से एक करार दिया। पंचकुला स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय 'पंचकमल' में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यमुनानगर के वरिष्ठ विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने सीधे कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज जो लोग संसद के भीतर और बाहर 'संविधान बचाने' का राजनीतिक ढोंग कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले आपातकाल के दौरान अपनी पार्टी द्वारा किए गए जनविरोधी और अलोकतांत्रिक कार्यों पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। इतिहास गवाह है कि संविधान को सबसे बड़ा खतरा कब और किससे हुआ था।

विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने आपातकाल के उन खौफनाक 21 महीनों की याद दिलाते हुए कहा कि उस दौर में आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बर्बरतापूर्वक कुचला गया था। संस्थाओं की स्वायत्तता को मिट्टी में मिला दिया गया और सबसे बड़ा प्रहार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किया गया था। उन्होंने पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह देश के हजारों लोकतंत्र सेनानियों, निडर राजनीतिक कार्यकर्ताओं, निष्पक्ष पत्रकारों और सामाजिक विचारकों को बिना किसी ठोस कानूनी आधार के रातों-रात जेल की कालकोठरियों में डाल दिया गया था। मीडिया जगत पर इतनी कड़ी सेंसरशिप लागू की गई थी कि अखबारों के संपादकीय पन्ने खाली छोड़ने पड़ते थे।

आरएसएस और जनसंघ ने निभाई थी लोकतंत्र की बहाली में मुख्य भूमिका

हरियाणा भाजपा के नेताओं ने इस ऐतिहासिक संघर्ष में अपने मातृ संगठन की भूमिका को भी रेखांकित किया। घनश्याम दास अरोड़ा ने याद किया कि जब देश के बड़े-बड़े दिग्गजों को जेल में बंद कर दिया गया था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और तत्कालीन भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने भूमिगत होकर आपातकाल का डटकर विरोध किया था। उन्होंने लोकतंत्र की बहाली और तानाशाही के खात्मे के लिए देशभर में एक बड़ा सत्याग्रह और आंदोलन चलाया, जिसके कारण आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और देश में दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नेताओं ने स्पष्ट किया कि भाजपा द्वारा 'संविधान हत्या दिवस' मनाने का वास्तविक और दूरगामी उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना नहीं है। बल्कि इसका मुख्य ध्येय उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले संघर्षशील लोगों को उचित सम्मान देना और आज की नई जनरेशन को आपातकाल के वास्तविक इतिहास और उसके भयंकर परिणामों से अवगत कराना है। इसी कड़ी में, हरियाणा भाजपा की ओर से गुरुवार की शाम ठीक 5 बजे पंचकुला के प्रतिष्ठित अटल सभागार में एक विशेष विमर्श कार्यक्रम और संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के प्रबुद्ध नागरिक, बुद्धिजीवी और उस दौर के चश्मदीद गवाह शामिल होकर अपने अनुभव साझा करेंगे। पार्टी इसे एक राष्ट्रीय चेतना के पर्व के रूप में देख रही है।

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