‘पर्यटन क्रांति’ की राह पर भारत: हजारों करोड़ के निवेश से बदली देश के पर्यटन स्थलों की तस्वीर
खबर सार :-
केंद्र सरकार की पर्यटन-केंद्रित योजनाओं ने देश के पर्यटन ढांचे को नई दिशा दी है। स्वदेश दर्शन, प्रसाद और अन्य निवेश योजनाओं के जरिए आधुनिक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है। बढ़ते विदेशी आगमन और वैश्विक रैंकिंग में सुधार यह संकेत देते हैं कि भारत आने वाले वर्षों में विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
खबर विस्तार : -
India Tourism Development: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पर्यटन योजनाओं ने देश के पर्यटन क्षेत्र में व्यापक बदलाव की नींव रखी है। पिछले एक दशक में पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास पर हजारों करोड़ रुपये के निवेश से देशभर के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की तस्वीर बदली है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के जरिए न केवल पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिली हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी नई मजबूती मिली है।
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, स्वदेश दर्शन योजना और प्रसाद (पीआरएएसएचएडी) योजना के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों का व्यापक विकास किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है।

स्वदेश दर्शन योजना: देशभर में 15 थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित
स्वदेश दर्शन योजना के पहले चरण के तहत देशभर में 15 थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए हैं। इन सर्किटों में बौद्ध, रामायण, आध्यात्मिक, रेगिस्तान, तटीय, इको और विरासत पर्यटन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिन पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन परियोजनाओं में से 75 का भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप पर्यटन स्थलों पर सड़क, पार्किंग, सूचना केंद्र, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, विश्राम स्थल और अन्य मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही पर्यटन स्थलों तक पहुंचने की कनेक्टिविटी भी पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।
प्रसाद योजनाः धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संचालित प्रसाद योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 1,700 करोड़ रुपये से अधिक है। योजना का उद्देश्य देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और धार्मिक पर्यटन को सशक्त बनाना है। इस योजना के अंतर्गत गुजरात के सोमनाथ, आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम और उत्तर प्रदेश के गोवर्धन सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न बुनियादी ढांचागत सुधार भी किए गए हैं।
SASCI योजना के तहत 3,295.76 करोड़ रुपये का निवेश
पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए केंद्र सरकार ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत भी बड़े पैमाने पर निवेश को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिन पर 3,295.76 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है। सरकार का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं विदेशी एवं घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी दिशा में पिछले दस वर्षों में देशभर के 100 से अधिक पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसके अलावा 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों के समग्र विकास का नया प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

विदेशी पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी
पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारत में 18.12 करोड़ अंतरराष्ट्रीय आगमन और 9.33 करोड़ विदेशी पर्यटक आगमन दर्ज किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय आगमन के आंकड़ों में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ अनिवासी भारतीय (NRI) भी शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की यात्रा को और आसान बनाने के उद्देश्य से सरकार ने ई-वीजा सुविधा का व्यापक विस्तार किया है। इसके चलते दुनिया के अनेक देशों के नागरिक अब सरल और तेज प्रक्रिया के माध्यम से भारत की यात्रा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-वीजा प्रणाली ने भारत की वैश्विक पर्यटन प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है।
पर्यटन क्षेत्रः देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 231.6 अरब डॉलर का योगदान
वर्तमान में भारत विश्व की शीर्ष पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में आठवें स्थान पर है। पर्यटन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 231.6 अरब डॉलर का योगदान दे रहा है। यह क्षेत्र लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी प्रदान कर रहा है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के अनुमान के अनुसार, यदि वर्तमान गति से निवेश और विकास कार्य जारी रहे तो अगले दस वर्षों में भारत वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था में चौथे स्थान तक पहुंच सकता है। यह उपलब्धि भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक पर्यटन बाजारों में शामिल कर सकती है।
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