Noida Engineer Death Case: दो बिल्डर कंपनियों पर FIR दर्ज, खड़े हुए गंभीर सवाल
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शुक्रवार रात एक दुखद घटना हुई, जहां युवराज नाम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। मृतक युवराज के पिता की शिकायत के आधार पर पहली FIR दर्ज की।
खबर विस्तार : -
Noida Engineer Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में एक बिल्डर की साइट पर एक इंजीनियर की मौत ने नोएडा अथॉरिटी और इसमें शामिल बिल्डर कंपनियों के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मृतक युवराज मेहता के पिता ने रेस्क्यू टीम पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब रेस्क्यू टीम उनके बेटे को बचाने आई, तो वे अपने साथ सिर्फ़ एक रस्सी लाए थे। उनके पास युवराज को बचाने के लिए कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था जिसका इस्तेमाल किया जा सके।
सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों पर नोएडा अथॉरिटी का लगभग ₹3,000 करोड़ बकाया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी बकाया रकम होने के बावजूद, अथॉरिटी न तो पैसा वसूल पाई है और न ही कंस्ट्रक्शन साइट पर कम से कम सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित कर पाई है।
सेक्टर-150 की जिस साइट पर यह हादसा हुआ, वहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। वहां कोई सुरक्षा बैरिकेड या चेतावनी के निशान नहीं थे। इसी लापरवाही के कारण एक इंजीनियर की मौत हो गई। इस घटना के बाद, अथॉरिटी और बिल्डरों के बीच कथित मिलीभगत पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जांच में जुटी CBI और ED
7 जुलाई, 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर्स को स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर यह ज़मीन अलॉट की गई थी। नियमों के अनुसार, इस ज़मीन का इस्तेमाल खेल और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाना था। हालांकि, आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने नियमों की अनदेखी की और ज़मीन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं को बेच दिया। इससे न केवल सरकार के राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि प्रोजेक्ट का मूल मकसद भी खत्म हो गया।
पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी अब जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर अलॉट की गई ज़मीन कैसे बेची गई और इस प्रक्रिया में विभिन्न अधिकारियों और बिल्डर कंपनियों की क्या भूमिका थी।
सबसे बड़ा सवाल नोएडा अथॉरिटी की भूमिका पर उठाया जा रहा है। वही अथॉरिटी जो हजारों करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में नाकाम रही, वह साइट पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी उपकरण और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में भी नाकाम रही। लोगों का मानना है कि अगर समय पर बकाया वसूली और कड़ी निगरानी की गई होती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।
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