Jammu and Kashmir: आतंक के खिलाफ पुंछ में NIA की बड़ी कार्रवाई, कई जगहों पर की छापेमारी
खबर सार :-
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार सुबह जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह अभियान आतंकवादी गतिविधियों और उनसे जुड़े फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा था।
खबर विस्तार : -
पुंछ: जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार सुबह पुंछ जिले के कई स्थानों पर व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। इस अभियान में स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उन व्यक्तियों और परिसरों को ध्यान में रखकर की गई, जिन पर आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता और अन्य प्रकार का समर्थन देने का संदेह है।
आतंकी नेटवर्क पर प्रहार की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, एनआईए की टीमों ने तड़के ही जिले के कई संवेदनशील इलाकों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। यह तलाशी उन परिसरों में की गई, जिन्हें कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग से जुड़े लोगों के ठिकानों के रूप में चिन्हित किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की आर्थिक जड़ों को कमजोर करने की दिशा में चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों, संचार रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जुटाने पर रहा। जांचकर्ताओं ने कई स्थानों से दस्तावेजों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल डिवाइस की जांच की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ सामग्रियां जब्त भी की गई हैं, जिनका संबंध आतंकी फंडिंग गतिविधियों से होने की आशंका जताई जा रही है। इन सामग्रियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संदिग्ध नेटवर्क किस प्रकार काम कर रहा था और उसके तार किन लोगों या संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।
लगातार लिया जा रहा एक्शन
अधिकारियों के अनुसार, एनआईए की विशेष टीमों ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इस पूरे अभियान को सावधानीपूर्वक अंजाम दिया। जांच एजेंसी का मानना है कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद उनके नेटवर्क को मजबूत करती है, इसलिए फंडिंग चैनलों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि हाल के समय में सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उन्हें खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
पहले भी कई बार हो चुकी है छापेमारी
यह पहली बार नहीं है जब एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में इस प्रकार की कार्रवाई की है। इससे पहले भी एजेंसी ने कई मामलों में छापेमारी और गिरफ्तारियां की हैं। हाल के महीनों में भी एजेंसी ने कई जिलों में तलाशी अभियान चलाकर संदिग्ध गतिविधियों की जांच की है।
2 फरवरी को एनआईए ने श्रीनगर, सोपोर, बांदीपोरा और बारामूला जिलों में एक बड़े सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया था। यह कार्रवाई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से जुड़े एक कथित आतंकी षड्यंत्र के मामले में की गई थी। उस दौरान जांच एजेंसी ने जेल में बंद कुछ आरोपियों के सहयोगियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों की तलाशी ली थी। अधिकारियों के अनुसार, उस अभियान का उद्देश्य आतंकवादी संगठनों और उनके स्थानीय नेटवर्क के बीच संबंधों का पता लगाना था।
इसके अगले ही दिन, यानी 3 फरवरी को श्रीनगर के रैनावारी इलाके में एक गैर-सरकारी संगठन से जुड़े मामले में भी एनआईए ने कार्रवाई की थी। इस मामले में एजेंसी ने एक संदिग्ध व्यक्ति के घर की तलाशी ली थी और उससे जुड़े दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की थी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि कहीं किसी सामाजिक संस्था का उपयोग अवैध गतिविधियों या आतंकी फंडिंग के लिए तो नहीं किया जा रहा।
इसी बीच, पुंछ जिले में हाल ही में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश भी सामने आई थी। 4 मार्च को भीमबेर गली सेक्टर में भारतीय सेना के जवानों ने आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया था। सेना को पहले से खुफिया इनपुट मिला था कि कुछ आतंकवादी नियंत्रण रेखा के पास सक्रिय हैं और भारत में घुसने की कोशिश कर सकते हैं।
नगरोटा मुख्यालय वाली सेना की व्हाइट नाइट कोर को जब इस गतिविधि की जानकारी मिली तो सैनिकों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया। लगातार निगरानी के दौरान सैनिकों ने नियंत्रण रेखा के पास संदिग्ध गतिविधि देखी। इसके बाद उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया। समन्वित और त्वरित जमीनी कार्रवाई के कारण आतंकियों के मंसूबे सफल नहीं हो सके।
स्थानीय नेटवर्क पर नजर
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल हथियारबंद आतंकियों से मुकाबला करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है। इसी रणनीति के तहत एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आतंकी फंडिंग के मामलों की गहराई से जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि हालिया छापेमारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस तरह की कार्रवाइयों के जरिए न केवल आतंकवादी संगठनों के स्थानीय नेटवर्क को उजागर किया जा रहा है, बल्कि उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता को भी रोकने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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