निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें थोपने पर NHRC सख्त, शिक्षा मंत्रालय और राज्यों को नोटिस
खबर सार :-
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए। NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एक शिकायत का संज्ञान लेते हुए ऐसा किया।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली। National Human Rights Commission यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बुधवार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उन शिकायतों के आधार पर की गई है, जिनमें आरोप लगाया गया कि कई निजी स्कूल नियमों का उल्लंघन करते हुए छात्रों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें थोप रहे हैं।
आयोग की यह कार्रवाई उसके सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा एक शिकायत पर संज्ञान लेने के बाद हुई। शिकायत में कहा गया था कि कई निजी स्कूल राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) या राज्य स्तर की राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को अनिवार्य बना रहे हैं।
शिक्षा की नीतियों का हो रहा उल्लंघन
शिकायत के अनुसार, निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में काफी महंगी होती हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उल्लेखनीय है कि एनसीईआरटी की किताबें सरकार द्वारा सब्सिडी के माध्यम से सस्ती उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को किफायती शिक्षा मिल सके।
NHRC ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह Right to Education Act 2009 (आरटीई अधिनियम, 2009) के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। विशेष रूप से धारा 29, जो पाठ्यक्रम और शैक्षणिक मानकों को निर्धारित करती है, का पालन न करना एक गंभीर मुद्दा है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि यह प्रवृत्ति राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) के उद्देश्यों के खिलाफ है, जिसका लक्ष्य सभी के लिए समान और सुलभ शिक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, कई स्कूलों द्वारा अतिरिक्त किताबें और वर्कबुक्स अनिवार्य करने से राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति 2020 का भी उल्लंघन हो रहा है, जिसमें छात्रों के स्कूल बैग के वजन को नियंत्रित करने और अनावश्यक शैक्षणिक बोझ को कम करने पर जोर दिया गया है।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए NHRC ने स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की जांच कर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
नोटिस जारी कर मांगा जवाब
आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या राज्यों ने जिला स्तर पर आरटीई अधिनियम की धारा 29 को लागू कराने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि नहीं, तो तत्काल ऐसे निर्देश जारी करने को कहा गया है, ताकि प्राथमिक स्तर पर केवल एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पुस्तकों को ही लागू किया जा सके।
इसके साथ ही राज्यों से यह जानकारी भी मांगी गई है कि सरकारी और निजी स्कूलों में कुल कितने छात्र अध्ययनरत हैं, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए किन-किन पुस्तकों की खरीद की गई है, और नियमों के अनुपालन की जांच के लिए क्या कोई निरीक्षण या ऑडिट किया गया है या नहीं।
जहां अब तक ऑडिट नहीं किया गया है, वहां NHRC ने 30 दिनों के भीतर स्कूल-वार जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति 2020 को सख्ती से लागू करने पर भी जोर दिया गया है।
आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को भी कहा है कि आरटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एनसीईआरटी और एससीईआरटी जैसी संस्थाओं की पाठ्यक्रम निर्धारण में क्या भूमिका है। इसके अतिरिक्त यह भी पूछा गया है कि क्या परीक्षा बोर्डों को प्राथमिक स्तर पर पाठ्यपुस्तकों के चयन का अधिकार है या नहीं।
NHRC ने सभी संबंधित पक्षों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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