कैश कांडः जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, अब फैसले पर टिकी नजर
खबर सार :-
जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला न केवल उनके भविष्य, बल्कि न्यायिक और संसदीय प्रक्रियाओं की सीमाओं को भी स्पष्ट करेगा। समिति की वैधता और प्रक्रिया की संवैधानिकता पर अदालत की टिप्पणी आगे के मामलों के लिए मिसाल बन सकती है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
खबर विस्तार : -
Cash Kand: ‘कैश कांड’ से जुड़े बहुचर्चित मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। यह याचिका संसद में चल रही उस प्रक्रिया से संबंधित है, जिसके तहत उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा रही है। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस फैसले को न्यायपालिका और विधायिका के संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
तीन सदस्यीय समिति पर उठे सवाल
जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत किसी न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है, जब लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार किया जाए। इसके बाद ही एक संयुक्त समिति गठित की जा सकती है। उनका कहना है कि चूंकि राज्यसभा में प्रस्ताव अभी लंबित है, इसलिए केवल लोकसभा स्पीकर द्वारा समिति बनाना कानून के विरुद्ध है।
समय सीमा बढ़ाने की मांग खारिज
सुनवाई के दौरान जस्टिस वर्मा ने समिति के समक्ष पेश होने की तय समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने साफ किया कि उन्हें 12 जनवरी को ही तीन सदस्यीय समिति के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। यह आदेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कोर्ट संसदीय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी के पक्ष में नहीं है।
कैश कांड की पृष्ठभूमि
कैश से जुड़े मामले की जड़ 14-15 मार्च 2025 की रात की घटना है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं। इनका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उस समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस व फायर सर्विस को सूचना दी थी। शुरुआती जांच में इस नकदी को अनएकाउंटेड बताया गया।
ट्रांसफर और मौजूदा स्थिति
घटना के करीब एक सप्ताह बाद जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य आवंटित नहीं किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO का रास्ता साफ, 3 नामों का पैनल तैयार
2026-09-01
-
देशभर में बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना, 20 राज्यों में अलर्ट
2026-09-01
-
आज से बढ़े कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दाम, रेस्तरां में खाना हो सकता है महंगा
2026-09-01
-
सुप्रीम कोर्ट से 'मोहम्मद' दीपक को राहत, FIR और सोशल मीडिया बैन पर रोक
2026-09-01
-
बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे पर समझौता, 25 साल पुराना विवाद खत्म
2026-08-31
-
रोहित शर्मा का टीवी डेब्यू: 'फैमिली फुल हाउस' शो 19 सितंबर से
2026-08-31
-
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हमला, तीन की मौत, जंगल में बीतेगी रात
2026-08-31
-
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: लूथरा बंधुओं को 2 हफ्ते में सरेंडर का आदेश
2026-08-31
-
राहुल गांधी पर एफआईआर को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
2026-08-31
-
भारतीय नौसेना को मिला गहरे समुद्र का संकटमोचक INS निपुण
2026-08-31
-
भारत-उज्बेकिस्तान के बीच हुए कई समझौते, रणनीतिक साझेदारी की घोषणा
2026-08-30
-
NEET-PG 2026: 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
2026-08-30
-
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों का डंप किया विस्फोटक बरामद
2026-08-30
-
NEET PG 2026: बिजली गुल होने से परीक्षा रुकी, 5 सितंबर को दोबारा होगी परीक्षा
2026-08-30
-
लखनऊः राजनाथ सिंह ने किया 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास
2026-08-30