JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं पर घमासान: रांची में 20वें दिन भी जारी छात्र आंदोलन, दो मांगों पर अटका गतिरोध

खबर सार :-

रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी है। छात्र JSSC-CGL रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अड़े हैं।
रांची छात्र आंदोलनः शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं सरकार

खबर विस्तार : -

रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन बुधवार को 20वें दिन भी जारी रहा। विधानसभा घेराव, पुलिस कार्रवाई और सरकार के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो सका है। छात्रों ने अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है, जबकि सरकार दोनों मांगों पर फिलहाल सहमत नहीं है।

छात्रों की पहली और सबसे प्रमुख मांग वर्ष 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की है। इस परीक्षा के जरिए दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और चयनित अभ्यर्थी फिलहाल अलग-अलग सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और इसलिए पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए।

सरकार के सामने चुनौती

सरकार का तर्क है कि JSSC-CGL परीक्षा को अब रद्द करना आसान नहीं है। परीक्षा से संबंधित शिकायतों की जांच पहले ही हो चुकी है और मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालतों के आदेश के बाद ही नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ था। ऐसे में सरकार के सामने पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई भी फैसला लेने की चुनौती है। सरकार की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि JSSC-CGL से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) कर रही है। सरकार का मानना है कि जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

CID जांच पर छात्रों को भरोसा नहीं

आंदोलनकारी छात्र सरकार के इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं। छात्रों ने CID की जांच की निष्पक्षता और गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कथित अनियमितताओं से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य अदालत के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए। छात्रों का कहना है कि इसी वजह से न्यायिक स्तर पर नियुक्तियों को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। आंदोलन के दौरान छात्र परीक्षा से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी TDAPL के कर्मचारी अभय तिवारी की गिरफ्तारी का भी उल्लेख कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि तिवारी एजेंसी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम करता था और बाद में इसी परीक्षा के जरिए ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर चयनित हुआ। आंदोलनकारी इसे परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के अपने आरोप का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में पूरी परीक्षा के रद्द होने या व्यापक स्तर पर अनियमितता साबित होने का न्यायिक प्रमाण नहीं है। मामले में जांच के निष्कर्ष और अदालतों के अंतिम निर्णय ही यह तय करेंगे कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में किस स्तर की गड़बड़ी हुई थी।

दूसरी मांग- सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच

छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की है। इस मांग पर भी सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। राज्य सरकार ने CBI जांच के बजाय एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक इस समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जा सकती है। सरकार का मानना है कि इस तरह की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच के जरिए छात्रों की शिकायतों की जांच की जा सकती है।

लेकिन आंदोलनकारी छात्र इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वे पहले ही राज्य की एजेंसियों की जांच प्रक्रिया पर भरोसा कर चुके हैं और अब उन्हें किसी ऐसी जांच की जरूरत है जिस पर सभी पक्षों को विश्वास हो। छात्रों के लिए CBI जांच केवल जांच एजेंसी बदलने की मांग नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बहाल करने का सवाल है।

बातचीत से नहीं निकला समाधान

आंदोलन के 20 दिन पूरे होने के बावजूद सरकार और छात्रों के बीच समाधान नहीं निकल पाया है। विधानसभा घेराव और पुलिस कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन दो प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। एक तरफ सरकार के सामने पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के हित, न्यायिक आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलता है। दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर अपने सवालों का स्वतंत्र जांच के जरिए जवाब चाहते हैं।

अब आंदोलन का अगला रुख सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों और छात्रों के साथ होने वाली आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर कायम हैं। ऐसे में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा को रद्द करने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और उस पर अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।

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