भारत का Defence Export : 2026 में 62% की बढ़त, 80 देशों तक हुई पहुंच, डीपीएसयू और निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान
खबर सार :-
भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 62% बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो उसकी वैश्विक रक्षा शक्ति को और मजबूत करता है। डीपीएसयू और निजी क्षेत्र के योगदान ने इस सफलता को संभव किया। 80 देशों को निर्यात और निर्यातकों की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र के वैश्विक प्रभाव को दिखाती है। यह भारत को वैश्विक रक्षा हब बनने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।
खबर विस्तार : -
India Defence Export Growth: भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह सफलता भारत के बढ़ते आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
लक्ष्यः वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपए
भारत ने वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा, 3 लाख करोड़ रुपए का रक्षा उत्पादन स्वदेश में होने का भी लक्ष्य है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह रक्षा निर्यात में 14,802 करोड़ रुपए की वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि में भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और निजी उद्योग दोनों का योगदान रहा है।

आत्मनिर्भर रक्षा सेक्टरः डीपीएसयू और निजी क्षेत्र का योगदान
भारत के रक्षा निर्यात में डीपीएसयू का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा। यह आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत का रक्षा सेक्टर अब आत्मनिर्भर और सहयोगी तरीके से विकसित हो रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नई सफलता की कहानी लिख रहा है। भारत के रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमतें और तकनीकी क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात में और वृद्धि होगी, और सरकार नई रणनीतियों और साझेदारियों पर भी काम कर रही है।
दुनिया भर में भारत की बढ़ती रक्षा उपस्थिति
भारत अब केवल रक्षा प्रणालियों और उप-प्रणालियों का भरोसेमंद वैश्विक साझेदार नहीं है, बल्कि वित्त वर्ष 2026 तक 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही, निर्यातकों की संख्या बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि यह साबित करती है कि भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर तेजी से स्वीकार किया जा रहा है और यह क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी जगह मजबूती से बना रहा है।
नवीनतम रक्षा विकास और बजट उपयोग
रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंत्रालय ने अपने पूंजीगत बजट का पूर्ण उपयोग कर लिया है, जो 1.86 लाख करोड़ रुपए था। यह लगातार दूसरा साल है जब रक्षा मंत्रालय ने अपना पूरा पूंजीगत बजट इस्तेमाल किया है। इससे पहले, वित्त वर्ष 2024-25 में भी कई वर्षों बाद पहली बार पूंजीगत बजट का पूरा उपयोग किया गया था। इस पूंजीगत बजट का बड़ा हिस्सा आधुनिक सैन्य उपकरणों की खरीद पर खर्च हुआ, जिसमें सबसे ज्यादा राशि लड़ाकू विमानों और उनके इंजन की खरीद पर खर्च की गई। इसके अलावा, सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद और विकास कार्य किए गए। मंत्रालय के अनुसार, इस खर्च का उद्देश्य सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को गति देना और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को मजबूत करना है।

रक्षा मंत्रालय का विकासात्मक दृष्टिकोण
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि प्रभावी खर्च न केवल सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। यह खर्च कई क्षेत्रों में प्रभाव डालता है, जिससे निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। भारत का रक्षा निर्यात, सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों से प्रेरित होकर वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
रक्षा मंत्री ने की तारीफ
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस शानदार सफलता की सराहना की और कहा कि यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नई सफलता की कहानी बताया। भारत का रक्षा उद्योग अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी मजबूत जगह बना चुका है, और निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की पहल ने भी इसे प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन-आधारित बना दिया है।
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