G-7 Summit 2026: जी-7 के मंच से पीएम मोदी ने दिया ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश, बोले- भारत के सभी प्रयासों के केंद्र में मानवता
खबर सार :-
G-7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में आपसी भरोसा और मानवता की प्रगति के लिए मजबूत साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है, जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।
खबर विस्तार : -
एवियन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आज के समय में आपसी भरोसा सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। उन्होंने फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान ये बातें कहीं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा आपस में जुड़े हुए हैं। इसे देखते हुए, मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए देशों के बीच मजबूत साझेदारी बनाना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 'X' पर लिखा, " दुनिया पहले से कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे समय में, यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है; हालांकि, कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।"
आपसी भरोसा सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में, व्यापार और तकनीक का इस्तेमाल अक्सर संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए किया जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे की कमी पैदा होती है। उन्होंने कहा, "आज, आपसी भरोसा सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है। दुख की बात है कि दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। हमारी साझेदारियों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम इस भरोसे को कैसे बहाल और मजबूत करते हैं।"
भारत का विश्वास 'वसुधैव कुटुंबकम'
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' में विश्वास करता है—यानी पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखना। हमारे अनुभव ने साबित किया है कि विकास तब सबसे प्रभावी होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप हो।" उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा 'मानवता पहले' के सिद्धांत का पालन किया है, और यह सोच आज भी उसके सभी प्रयासों के केंद्र में है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह सोच भारत की कई अंतरराष्ट्रीय पहलों का आधार है, जैसे कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन LiFE और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान।
सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण पर खास जोर
भारत के समावेशी और टिकाऊ विकास के सफर के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय' (सभी के कल्याण और खुशी के लिए) के मंत्र ने देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इस सोच के अच्छे नतीजे मिले हैं, जैसे कि वित्तीय समावेश, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, टेक्नोलॉजी से सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास। उन्होंने कहा, "भारत का मानना है कि साझेदारी की असली परीक्षा इस बात में नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि इस बात में है कि हम उन्हें खुद के लिए कुछ बनाने में कैसे सक्षम बनाते हैं। हमारी विकास साझेदारियां इसी भावना को दिखाती हैं। हमने अपने सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर खास जोर दिया है।"
सम्मान पर आधारित होनी चाहिए साझेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं और वे सिर्फ मदद के बजाय बराबरी की साझेदारी चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हमें 'देने वाले और लेने' वाली सोच से आगे बढ़कर बराबरी के साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। हमें साथ-साथ चलना चाहिए, सिर्फ अगल-बगल नहीं। साझेदारियां सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं।"
अफ्रीका में भारत की पहलों का भी जिक्र
उन्होंने अफ्रीका में भारत की पहलों का भी जिक्र किया और बताया कि भारत ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "ये कोशिशें अफ्रीकी देशों की क्षमताओं को बढ़ा रही हैं और उन्हें बड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद कर रही हैं।"
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