अमित शाह बोले- नक्सलवाद पीड़ितों को सम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाना सरकार की प्राथमिकता
खबर सार :-
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजनों की मदद को प्राथमिकता बताया। सेवा संकल्प अभियान के तहत 3,600 से अधिक लोगों को मिले कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पिछले पांच दशकों में नक्सलवाद ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के गरीब आदिवासियों को गहरी चोट पहुंचाई है। नक्सल हिंसा के कारण दिव्यांग हुए लोगों के जीवन में फिर से खुशियां लाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करने के प्रयासों के साथ-साथ हिंसा से प्रभावित लोगों के जीवन को दोबारा संवारना भी जरूरी है। केंद्रीय गृह मंत्री गुरुवार को छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों और अन्य दिव्यांगजनों के लिए आयोजित सहायता उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे सेवा कार्यक्रमों का हिस्सा है।
3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ
अमित शाह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के तहत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायता उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस अभियान के अंतर्गत 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाया गया। इनमें अकेले बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे। गृह मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े बस्तर के लोगों की पीड़ा और नक्सलवाद के कारण गरीब आदिवासी परिवारों को हुए नुकसान को दर्शाते हैं। पांच दशकों तक चली हिंसा ने क्षेत्र के लोगों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है। कई लोगों को ऐसी दिव्यांगता का सामना करना पड़ा, जिसने उनके सामान्य जीवन, रोजगार और आजीविका के साधनों को प्रभावित किया।
नक्सलवाद खत्म करने के साथ ही पुनर्वास
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करने का अर्थ यह नहीं है कि पिछले पांच दशकों में लोगों ने जो दुख झेले हैं, वे अपने आप मिट जाएंगे। हिंसा से प्रभावित लोगों के घाव भरने और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन जीने में मदद करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों की पहचान की जाए, जिन्हें नक्सली हिंसा के कारण शारीरिक नुकसान हुआ है, और उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिन लोगों ने अपने हाथ-पैर गंवाए हैं, जिनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है या जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है, उन्हें उचित सहायक उपकरण और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कृत्रिम अंगों से आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद
उन्होंने सहायता कार्यक्रम के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताया। उनके अनुसार, इस तरह की पहल का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के काम खुद करने का अवसर मिलता है।अमित शाह ने अभियान के एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसे व्यक्ति की बात सुनी, जिसे इस कार्यक्रम के तहत सहायता मिली थी। उस व्यक्ति ने बताया कि तीन साल बाद वह अपने हाथ से गिलास उठाकर खुद पानी पी सका।
जीवन को बेहतर बनाने पर जोर
बस्तर लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। हिंसा के कारण कई परिवारों को शारीरिक नुकसान, आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने जैसी पहल उनके पुनर्वास में मदद कर सकती है।सेवा संकल्प अभियान के तहत सहायता वितरण का उद्देश्य प्रभावित लोगों की जरूरतों को पहचानकर उन्हें उपयोगी उपकरण उपलब्ध कराना है। इससे उन्हें दैनिक गतिविधियों में सुविधा मिल सकती है और सामाजिक जीवन में भागीदारी बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
सहायता से सम्मानजनक जीवन की ओर
केंद्र सरकार की इस पहल के तहत कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों का वितरण नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है। अभियान में 3,600 से अधिक लोगों को लाभ मिलने और बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों की मदद का उद्देश्य केवल उन्हें उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने के अवसर देना है। नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास, आजीविका और दैनिक जीवन की सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।
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