मोबाइल से पढ़ाई कर किया नीट क्वालीफाई, बोलीं-डॉक्टर बनकर करूंगी सेवा

खबर सार :-

एक ओर नीट पेपर लीक का मामला देश में छाया हुआ है। शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा भी दे दिया है। वही भुवनेश्वर में नीट क्वालीफाई करने वाली छात्रा अपनी पूरी मेहनत की कीमत लगाते हुए बोलती है कि उनकी मेहनत सफल हो जाएगी, जब उसे लोगों की सेवा करने का अवसर मिल जाएगा।
मोबाइल से पढ़ाई कर किया नीट क्वालीफाई, बोलीं-डॉक्टर बनकर करूंगी सेवा

खबर विस्तार : -

भुवनेश्वर; एक ओर नीट पेपर लीक का मामला देश में छाया हुआ है। शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा भी दे दिया है। वही भुवनेश्वर में नीट क्वालीफाई करने वाली छात्रा अपनी पूरी मेहनत की कीमत लगाते हुए बोलती है कि उनकी मेहनत सफल हो जाएगी, जब उसे लोगों की सेवा करने का अवसर मिल जाएगा। भुवनेश्वर की रहने वाली छात्रा लक्ष्मी बनारा का कहना है कि वह डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती है। वह उन मरीजों पर विशेष तौर से ज्यादा ध्यान देगी जो गरीब हैं। लक्ष्मी का कहना है कि वह डॉक्टर बनकर दिखाएंगी।

समय मिलता है तो परिवार की मदद भी करती

नीट क्वालीफाई करने वाली छात्रा ने बताया कि वह एक गांव में रहने वाली है और क्वालीफाई किया है। डॉक्टर बनने की इच्छा उसमें है। वह और उसका परिवार पेट पालने के लिए खेतों में काम करते हैं। वह कॉलेज भी जाती है। और जब भी समय मिलता है तो परिवार की मदद भी करती है। उसने बताया कि केमिस्ट्री ठीक-ठाक थी, लेकिन बायोलॉजी आसान थी। उसे ऐसा लगा कि वह फिजिक्स नहीं चला सकती है। बायोलॉजी उसकी पसंदीदा विषय में था, इसलिए उसे उम्मीद काफी रही है। उम्मीद  है प्राइवेट नौकरी में वह जाएगी, क्योंकि रैंकिंग में करीब 9 लाख अंक पर है।

मुश्किल परीक्षा में भी सफलता हासिल कर ली

उसका कहना है कि मरीजों की सेवा करना उसका मकसद है। इसीलिए अभी वह और मेहनत कर रही है। नकल और कम नंबर के बारे में वह कहती है कि जितनी उसने मेहनत की उतनी उसे सफलता हासिल हुई। मोबाइल से पढ़ाई करती है और परीक्षा की तैयारी भी मोबाइल से ही कर रही थी। उसने बताया कि कोई सब्सक्रिब्शन भी नहीं लिया था। पूरा भरोसा है कि वह आगे चलकर अपनी जिंदगी बेहतर से संभालेगी। इसी तरह यहां के छात्र सुदाम हेम्ब्रम कहते हैं कि किन-किन चुनौतियों का सामना किया है यह खुद पता नहीं, लेकिन नीट जैसी मुश्किल परीक्षा में भी सफलता हासिल कर ली। उसका कहना है की खेती करके अपना गुजारा करते हैं। उसके रिजल्ट से वह खुश है। इस बात से भी कि डॉक्टर बनने के लिए ही उसने पढ़ाई शुरू की थी। सभी लड़के गांव के प्रतिभाशाली हैं? लेकिन धन में वह सबसे कमजोर है। वह कहते हैं कि लोगों को स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।

समय की कीमत है मालूम

नीट क्वालीफाई करने वाले छात्रों का कहना है कि वह किसी आंदोलन या प्रदर्शन में नहीं पढ़ते हैं। वह ज्यादा से ज्यादा समय अपनी पढ़ाई पर लगाते हैं। वहां अगर समय निकलता है तो वह अपने घर वालों की मदद करते हैं। खेती में समय लगते हैं। उनका कहना है कि जो समय इधर-उधर लगाएंगे, उससे घर परिवार की मदद होगी तो दो चार पैसे खेती के जरिए आ जाएंगे। आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उन्हें ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। उन्हें समय की कीमत मालूम है।

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