नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में डिजिटल कंपनियों और स्टार्टअप्स का अहम योगदान है। वर्ष 2025 से शुरुआती पांच महीनों में पब्लिक इश्यू लाने के लिए 90 कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कराए हैं। यह ऐसे समय में हुआ है, इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ मार्केट वैश्विक उतार-चढ़ाव की वजह से काफी प्रभावित हुआ है, यह अत्यंत कमजोर स्थिति में है। हालांकि, वर्ष 2024 की समान अवधि के मुकाबले वर्ष 2025 में आने वाले आईपीओ की संख्या करीब आधी रह गई है।
सेबी की वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई जानकारी के अनुसार जनवरी 2025 में 28 कंपनियों ने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा कराए थे। इसके बाद फरवरी में 15 कंपनियों, मार्च में 11 कंपनियों, अप्रैल में 24 कंपनियों और मई में अब तक 12 कंपनियों ने ड्राफ्ट पेपर सेबी के पास जमा करा दिए हैं। दरअसल, जब भी किसी कंपनी को शेयर बाजार में आईपीओ के माध्यम से कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए पैसे जुटाने होते हैं, तो वह सबसे पहले सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर फाइल करती है। इस ड्राफ्ट में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के साथ कारोबार और उससे जुड़े जोखिम समेत सभी प्रकार की अहम जानकारियां मौजूद रहती हैं। इस साल जनवरी से अब तक ड्राफ्ट पेपर जमा कराने वाली प्रमुख कंपनियों में केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस, केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स, वीवर्क इंडिया जैसी कंपनियों का नाम शामिल है।
हालांकि, आईपीओ की परफॉरमेंस को देखें, तो वर्ष 2025 के पहले पांच महीने काफी कमजोर स्थिति में रहे हैं। जनवरी से मई तक मेनबोर्ड सेगमेंट में मात्र 9 कंपनियों की ही लिस्टिंग हुई है, जबकि 2024 की समान अवधि में यह आंकड़ा 25 से भी अधिक था। वैश्विक अस्थिरता के चलते भारतीय शेयर बाजार में 2025 में अब तक काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस साल पांच महीनों में सेंसेक्स ने 2.73 प्रतिशत और निफ्टी ने करीब 3 प्रतिशत का रिटर्न निवेशकों को दिया है।
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