Infosys Prize 2025: इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति ने गुरुवार को भारत में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और इनोवेटर्स के लिए एक मजबूत और सहयोगी माहौल की मांग की। मुंबई में आयोजित इंफोसिस साइंस फाउंडेशन (ISF) के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत को रिसर्च को ‘लग्जरी’ नहीं बल्कि ‘राष्ट्रीय जरूरत’ के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है। मूर्ति ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति, साहस और अनुशासन जरूरी है — यही तत्व किसी राष्ट्र की बौद्धिक प्रगति का आधार बनते हैं।
नारायण मूर्ति ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि जो देश बेसिक रिसर्च में निवेश करता है, वही वैज्ञानिक प्रगति, आर्थिक मजबूती और सामाजिक कल्याण में अग्रणी बनता है। उन्होंने कहा कि भारत को भी इसी दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि नवाचार और खोज का वातावरण मजबूत हो सके। मूर्ति ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उद्धृत करते हुए याद दिलाया कि “विज्ञान ही गरीबी, भुखमरी और अंधविश्वास का समाधान है।
इंफोसिस साइंस फाउंडेशन ने 15 मई को अपनी एज पॉलिसी में बदलाव करते हुए पुरस्कार विजेताओं की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष कर दी। इस बदलाव का उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना है ताकि वे शुरुआती दौर में ही अपने विचारों और आविष्कारों को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकें। इंफोसिस पुरस्कार 2025 के तहत छह रिसर्चर्स को मार्केट डिजाइन, मैथेमैटिकल ऑप्टिमाइजेशन और एल्गोरिद्म थ्योरी जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। हर पुरस्कार में गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र और एक लाख डॉलर की राशि दी जाती है।
इंफोसिस के सितंबर तिमाही के नतीजों में कंपनी ने 7,364 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो वार्षिक आधार पर 13% की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, जून तिमाही की तुलना में यह लाभ 5% बढ़ा है। भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस के लिए यह प्रदर्शन देश की तकनीकी और शोध क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
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