नई दिल्लीः भारत में घरेलू निवेशकों का शेयर बाजार की ओर झुकाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जुलाई 2025 में देश में डिमैट अकाउंट्स की संख्या ऐतिहासिक स्तर को पार करते हुए 20.21 करोड़ हो गई है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, केवल जुलाई महीने में ही 29.80 लाख नए डिमैट अकाउंट्स खोले गए।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जून 2025 में सिर्फ 2.52 लाख नए अकाउंट्स ही खुले थे, जबकि जुलाई में बाजार में अस्थिरता बनी रही और निवेशक बिकवाली के दबाव में भी रहे। इसके बावजूद, निवेशकों का भरोसा डगमगाया नहीं और रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने बाजार में कदम रखा। डिमैट अकाउंट्स की संख्या में यह उछाल मुख्य रूप से प्राइमरी मार्केट में बढ़ी हलचल के कारण देखा गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में आए आईपीओ (IPO) आकर्षक वैल्यूएशन पर लॉन्च हुए, जिससे नए निवेशकों को बेहतर रिटर्न की उम्मीद बनी और उन्होंने सेकेंडरी मार्केट की तुलना में प्राइमरी मार्केट को तरजीह दी।
खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि जुलाई में प्राइमरी मार्केट में गतिविधि तेज रही, जिससे नए निवेशकों को अवसर दिखा। सेकेंडरी मार्केट में वैल्यूएशन ऊंचे स्तर पर होने के कारण लोगों ने आईपीओ में भाग लेकर निवेश शुरू करना बेहतर समझा। उन्होंने यह भी बताया कि ज़्यादातर नए निवेशक शेयर बाजार में कदम आईपीओ के जरिए रख रहे हैं और इसके लिए उन्हें डिमैट अकाउंट खोलना अनिवार्य होता है। यही कारण है कि डिपॉजिटरी के आंकड़े एक नया रिकॉर्ड दिखा रहे हैं। शेयर बाजार में बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि लोग अब पारंपरिक निवेश साधनों से आगे बढ़कर इक्विटी मार्केट को एक व्यवहारिक और लाभदायक विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। साथ ही, सरकार और सेबी द्वारा निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम भी इस रुझान को मजबूती दे रहे हैं।
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