Gold-Silver ETF में निवेश का विस्फोट: AUM 3 लाख करोड़ पार, जनवरी में टूटा रिकॉर्ड
खबर सार :-
जनवरी में गोल्ड और सिल्वर ETF में रिकॉर्ड निवेश ने स्पष्ट कर दिया है कि निवेशक अनिश्चित माहौल में सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं। 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक AUM और 33,000 करोड़ से ज्यादा मासिक निवेश इस ट्रेंड को मजबूत करते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि संतुलित पोर्टफोलियो के लिए 10-15 प्रतिशत हिस्सा कीमती धातुओं में रखना समझदारी हो सकती है।
खबर विस्तार : -
Gold Silver ETF Investment: आर्थिक अनिश्चितता और बाजार की उठापटक के बीच निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर तेज रुख किया है। इसका सबसे बड़ा संकेत जनवरी के आंकड़ों में देखने को मिला, जब गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 3 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा डेटा ने इस तेज रफ्तार निवेश को उजागर किया है।
पिछले पांच महीनों में इन फंड्स का AUM लगभग तीन गुना बढ़ा है। अगस्त 2025 में जहां गोल्ड और सिल्वर ETF का कुल AUM करीब 1 लाख करोड़ रुपए था, वहीं जनवरी के अंत तक यह बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह उछाल ऐसे समय में आया है, जब सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
जनवरी में रिकॉर्ड इनफ्लो
जनवरी महीने में गोल्ड ETF में 24,039 करोड़ रुपए और सिल्वर ETF में 9,463 करोड़ रुपए का निवेश आया। दोनों को मिलाकर कुल निवेश 33,000 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। खास बात यह है कि यह आंकड़ा उसी महीने इक्विटी फंड्स में आए 24,029 करोड़ रुपए के निवेश से भी अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखें तो दिसंबर में गोल्ड और सिल्वर ETF में कुल 15,609 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था, जबकि इक्विटी फंड्स में 28,055 करोड़ रुपए आए थे। यानी जनवरी में कीमती धातुओं ने इक्विटी फंड्स को पीछे छोड़ दिया।

निवेशकों की संख्या में जबरदस्त उछाल
आंकड़ों पर गौर करें, तो देश में न सिर्फ निवेश राशि, बल्कि निवेशकों की संख्या में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई। गोल्ड ETF में फोलियो की संख्या 80.34 लाख से बढ़कर 1.14 करोड़ हो गई। वहीं सिल्वर ETF में फोलियो 11.31 लाख से उछलकर 47.85 लाख तक पहुंच गए। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशकों के बीच भी कीमती धातुओं की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार में अस्थिरता के कारण निवेशकों ने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए सोना और चांदी जैसे सुरक्षित एसेट्स को प्राथमिकता दी है।
रणनीतिक एसेट एलोकेशन की सलाह
बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि लंबी अवधि के निवेशक अपने कुल निवेश का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा कीमती धातुओं में रखें। हालांकि, वे एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध या किस्तों में निवेश करने की सलाह देते हैं, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, बाजार की अस्थिरता के बावजूद निवेश का प्रवाह जारी रहा है। नियमित SIP निवेश और भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर भरोसे ने निवेशकों का मनोबल बनाए रखा है।
इक्विटी और डेट फंड्स का हाल
जनवरी के अंत तक ओपन-एंडेड इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों का कुल AUM 34.86 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि ओपन-एंडेड डेट-ओरिएंटेड स्कीमों का AUM 18.90 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। हालांकि मिड और स्मॉल कैप फंड्स में निवेश की रफ्तार कुछ धीमी हुई, लेकिन लार्ज-कैप और फोकस्ड फंड्स में दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बेहतर बढ़त देखी गई। कुल मिलाकर, जनवरी के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम संतुलन बनाए रखने के लिए गोल्ड और सिल्वर ETF को प्रमुख विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
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