एफपीआई ने अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजारों में की वापसी, फ्रांस सबसे आगे
खबर सार :-
अक्टूबर 2025 में एफपीआई की मजबूत वापसी भारतीय शेयर बाजारों में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत देती है। फ्रांस, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों के निवेश ने पूंजी प्रवाह को गति दी है। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजे, ब्याज दरों में संभावित कटौती और स्थिर आर्थिक माहौल भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहे हैं, जिससे आने वाले महीनों में बाजार और सशक्त हो सकते हैं।
खबर विस्तार : -
FPI Investment: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर 2025 में भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार वापसी की है। तीन महीनों की लगातार बिकवाली के बाद यह एफपीआई के निवेश रुझान में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस ने इस वापसी की अगुवाई की है, जिसने भारतीय इक्विटी में 2.58 अरब डॉलर और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में 152 मिलियन डॉलर का निवेश किया।
तीन महीने बाद फिर से बढ़ी एफपीआई की दिलचस्पी
सितंबर में जहां एफपीआई ने करीब 2.7 अरब डॉलर की बिकवाली की थी, वहीं अक्टूबर में 1.66 अरब डॉलर का ताजा निवेश दर्ज किया गया। यह भारतीय बाजारों में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है। फ्रांस के अलावा, अमेरिका और जर्मनी ने भी भारतीय शेयरों में मजबूत रुचि दिखाई, दोनों देशों ने लगभग 520 मिलियन डॉलर का निवेश किया। अमेरिकी निवेशकों ने डेट मार्केट में भी 765 मिलियन डॉलर, जबकि जर्मनी ने 309 मिलियन डॉलर का निवेश जोड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्पोरेट नतीजों में मजबूती, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित कटौती और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की उम्मीदें इस निवेश को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण हैं।
आयरलैंड, मलेशिया और अन्य देशों का बढ़ा रुझान
एफपीआई के इस रुझान में केवल बड़े देश ही नहीं, बल्कि छोटे बाजारों ने भी योगदान दिया। आयरलैंड ने अक्टूबर में 400 मिलियन डॉलर का निवेश इक्विटी में और 138 मिलियन डॉलर डेट इंस्ट्रूमेंट्स में किया। वहीं, मलेशिया से 342 मिलियन डॉलर इक्विटी और 68 मिलियन डॉलर डेट में आए। हांगकांग ने 177 मिलियन डॉलर, जबकि डेनमार्क और नॉर्वे ने करीब 100 मिलियन डॉलर का निवेश भारतीय इक्विटी में किया। इन निवेशों ने बाजार में विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दिया, जिससे घरेलू निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ।
सिंगापुर की बिकवाली के बावजूद बना नेट पॉजिटिव बैलेंस
हालांकि सिंगापुर की ओर से अक्टूबर में 98 मिलियन डॉलर की इक्विटी बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन साथ ही उसने 260 मिलियन डॉलर डेट मार्केट में लगाए, जिससे उसकी नेट पोजिशन पॉजिटिव रही। दूसरी ओर, कुछ अन्य देशों ने संयुक्त रूप से करीब 3 अरब डॉलर की बिकवाली की। इसके बावजूद, एफपीआई की कुल वापसी ने भारतीय बाजारों को मजबूती दी। अक्टूबर में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 4.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
निवेशकों का भरोसा और बाजार की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि एफपीआई की यह वापसी भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं पर उनके भरोसे को दर्शाती है। मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतक, कॉर्पोरेट आय में वृद्धि और वैश्विक निवेश माहौल में स्थिरता भारत को एफपीआई के लिए आकर्षक गंतव्य बना रही है। आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहा तो भारतीय बाजारों में पूंजी प्रवाह में और तेजी देखी जा सकती है।
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