ऑटो-मेटल की रफ्तार से बाजार में तेजी, भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा निवेशकों का भरोसा
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा तेजी ऑटो, मेटल और मिडकैप शेयरों की मजबूती के साथ-साथ मजबूत आर्थिक संकेतकों का नतीजा है। सीमित दायरे में कारोबार यह दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की मजबूती, स्थिर महंगाई और बेहतर जीएसटी कलेक्शन आने वाले समय में बाजार को सहारा दे सकते हैं।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market: वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में ही निवेशकों का रुझान ऑटो और मेटल शेयरों की ओर दिखाई दिया, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 84,065.75 के मुकाबले 144.25 अंकों की बढ़त के साथ 84,210 पर खुला, जबकि निफ्टी 55.35 अंकों की तेजी के साथ 25,922.65 पर खुला।
सेंसेक्स-निफ्टी में सीमित दायरे में मजबूती
दिनभर के कारोबार के बाद सेंसेक्स 208.17 अंक या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 84,273.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 67.85 अंक या 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,935.15 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की यह चाल बताती है कि निवेशक फिलहाल सतर्कता के साथ चुनिंदा सेक्टरों में निवेश कर रहे हैं।
ऑटो और मेटल सेक्टर रहे चमकदार
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 1.37 प्रतिशत की तेजी के साथ शीर्ष पर रहा। ऑटो सेक्टर में मांग में सुधार और आगामी तिमाहियों में बेहतर बिक्री की उम्मीदों ने निवेशकों को आकर्षित किया। इसके अलावा निफ्टी मेटल 0.81 प्रतिशत चढ़ा, जिसे वैश्विक कमोडिटी कीमतों में स्थिरता और घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों से समर्थन मिला। अन्य तेजी वाले सेक्टरों में निफ्टी कंजप्शन (0.61 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.56 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (0.55 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.45 प्रतिशत) शामिल रहे।
फार्मा और पीएसयू बैंक में दिखी कमजोरी
दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों में मुनाफावसूली का दबाव देखा गया। निफ्टी फार्मा 0.36 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.27 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। दवा कंपनियों में वैश्विक रेगुलेटरी चिंताओं और पीएसयू बैंकों में सीमित क्रेडिट ग्रोथ की आशंकाओं ने दबाव बनाया।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 294.75 अंक या 0.49 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,735.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 65.30 अंक या 0.38 प्रतिशत चढ़कर 17,451.20 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में भी बना हुआ है।

सेंसेक्स पैक: कौन चमका, कौन फिसला
सेंसेक्स के गेनर्स में इटरनल, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी, एलएंडटी, टीसीएस और मारुति सुजुकी प्रमुख रहे। बैंकिंग और कंज्यूमर सेक्टर से एक्सिस बैंक, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फिनसर्व में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, एसबीआई और इंडिगो जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
टेक्निकल नजरिया: बाजार फिलहाल संतुलन में
एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह के अनुसार, निफ्टी ने मंगलवार को केवल 119 अंकों की सीमित रेंज में कारोबार किया। यह संकेत देता है कि अल्पकाल में बाजार किसी एक दिशा में तेज मूवमेंट नहीं दिखा सकता। उनके मुताबिक निफ्टी के लिए 26,050 से 26,100 का स्तर अहम रुकावट है। यदि यह स्तर पार होता है तो निफ्टी 26,250 तक जा सकता है। वहीं नीचे की ओर 25,800 से 25,770 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है।
जनवरी का बाजार विश्लेषण: मिडकैप का दबदबा
जनवरी महीने में बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन सालाना आधार पर मिडकैप शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी मिडकैप 150 जनवरी में 3.53 प्रतिशत गिरा, लेकिन पूरे साल में इसने 8.26 प्रतिशत का रिटर्न दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी में निफ्टी 500 इंडेक्स को केवल कमोडिटी सेक्टर से सकारात्मक योगदान मिला। मेटल और डिफेंस सेक्टर में करीब 6 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि एफएमसीजी, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 6 से 11 प्रतिशत तक की गिरावट आई।
अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत
आर्थिक मोर्चे पर तस्वीर उत्साहजनक बनी हुई है। जनवरी में सीपीआई महंगाई दर 1.33 प्रतिशत पर रही, जबकि 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 6.70 प्रतिशत हो गई। इसके बावजूद नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं। कंपोजिट पीएमआई 59.5 पर रहा और जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
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