US-Iran Ceasefire Impact: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित दो हफ्तों के सीजफायर का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर सोने की कीमतें सीमित दायरे में स्थिर बनी हुई हैं, वहीं कच्चे तेल में तेज गिरावट ने बाजार की दिशा बदल दी है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर कमोडिटी की चाल किस तरह बदल सकती है। 8 अप्रैल की सुबह दोनों देशों द्वारा सीजफायर की घोषणा के बाद से कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। इसका सीधा असर ऊर्जा और कीमती धातुओं के बाजार पर पड़ा है।
सीजफायर से पहले 7 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल थी। लेकिन एक हफ्ते के भीतर इसमें करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत घटकर लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड में इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। 7 अप्रैल को इसकी कीमत 112.95 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब घटकर करीब 96 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। यह लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में तनाव कम होने से सप्लाई बाधित होने का खतरा घटा है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना है। इससे आयात करने वाले देशों, खासकर भारत जैसे देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कच्चे तेल के मुकाबले सोने की चाल अपेक्षाकृत स्थिर रही है। सीजफायर के बाद सोने की कीमत में हल्की तेजी देखने को मिली है। सोना 2.66 प्रतिशत बढ़कर 4,810 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है, जबकि पहले यह 4,684 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, यह तेजी बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही क्योंकि निवेशक अभी भी सतर्क हैं और वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को लेकर अमेरिका के रुख के कारण पहले सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली थी। उनका अनुमान है कि आने वाले दिनों में सोना 1,48,500 रुपये से 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकता है।

वर्तमान वैश्विक हालातों में जहां सोना सीमित दायरे में है, वहीं चांदी और कॉपर में मजबूती देखने को मिली है। 7 अप्रैल को चांदी की कीमत 72 डॉलर प्रति औंस थी, जो एक हफ्ते में 8 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 78 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। कॉपर की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। यह करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 6 डॉलर प्रति पाउंड पर पहुंच गया है, जो पहले 5.5 डॉलर प्रति पाउंड था। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों में सुधार और वैश्विक मांग बढ़ने से इन धातुओं को समर्थन मिल रहा है।
सीजफायर के बाद बाजार में स्थिरता के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन पूरी तरह से अनिश्चितता खत्म नहीं हुई है। निवेशक फिलहाल संतुलित रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं। जहां जोखिम कम होने पर तेल जैसी कमोडिटी में गिरावट आती है, वहीं सोना सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी पकड़ बनाए रखता है। चांदी और कॉपर जैसी धातुएं आर्थिक गतिविधियों के संकेत देती हैं, इसलिए इनमें तेजी को सकारात्मक माना जा रहा है।
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