शाहपुरा में 17 से 31 मई तक विशेष आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन, जोरों पर तैयारी

खबर सार :-
महर्षि गौतम संस्थान, शाहपुरा के तत्वावधान में शाहपुरा में 17 मई से 31 मई तक नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण हेतु विशेष शिविर का आयोजन किया जायेगा। आयोजन में सप्त ऋषि ज्योतिष वेधशाला राजस्थान एवं पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला का सहयोग रहेगा।

शाहपुरा में 17 से 31 मई तक विशेष आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन, जोरों पर तैयारी
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः शाहपुरा में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार को लेकर एक विशेष पहल की जा रही है। महर्षि गौतम संस्थान शाहपुरा के तत्वावधान में 17 से 31 मई तक संस्कार एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर विभिन्न संतों के सान्निध्य में आयोजित होगा, जिसमें क्षेत्र के लोगों को वैदिक परंपराओं और अनुशासित जीवनशैली से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

आयु वर्ग में विभाजित किए जाएंगे प्रतिभागी

आचार्य मनीष गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर का संचालन महंत स्वामी श्री मणि महेश चैतन्य जी महाराज, रामस्नेही संत दिग्विजय रामजी एवं निंबार्क पीठाधीश्वर श्री श्याम शरण देवाचार्य जी के मार्गदर्शन में किया जाएगा। आयोजन में सप्त ऋषि ज्योतिष वेधशाला राजस्थान और पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला का भी सहयोग रहेगा।

शिविर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों को तीन आयु वर्गों में विभाजित किया गया है। पहले वर्ग में 5 से 18 वर्ष तक के बालक और किशोर शामिल होंगे। दूसरे वर्ग में 18 वर्ष से अधिक आयु के युवक, वयस्क और वरिष्ठ नागरिक भाग ले सकेंगे। तीसरा वर्ग विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों के लिए निर्धारित किया गया है, ताकि सभी वर्गों को उनकी आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षण दिया जा सके।

प्रन्नोत्तरी सत्र का भी होगा आयोजन 

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संध्या वंदन, गायत्री जप की विधि, सांयकालीन पूजा एवं आरती की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। इसके साथ ही दैनिक जीवन को अनुशासित और संतुलित ढंग से जीने के उपाय भी बताए जाएंगे। शिविर में भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की जाएंगी।

शिविर की एक खास विशेषता यह होगी कि प्रतिदिन शाम को एक घंटे का प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में प्रतिभागी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों से सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

आयोजकों ने शिविर के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य की है। पुरुषों और बालकों के लिए श्वेत धोती-दुपट्टा तथा महिलाओं और किशोरियों के लिए पीले और लाल रंग के पारंपरिक वस्त्र निर्धारित किए गए हैं। संस्थान ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में भाग लेकर भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया है।

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