Shahjahanpur News: किसान बिचौलियों को अपना धान बेचने को मजबूर

खबर सार :-
Shahjahanpur News: शाहजहांपुर जिले में धान खरीद केंद्रों पर बिचौलियों और सत्ताधारी नेताओं का कब्जा है, जिससे किसानों को सरकारी मूल्य पर धान बेचने में समस्या हो रही है। दलालों की वजह से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और वे अपनी फसल को ओने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।

Shahjahanpur News: किसान बिचौलियों को अपना धान बेचने को मजबूर
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश में धान खरीद सेंटरों पर किसानों को धान बिक्री करने को लेकर काफी हाय तौबा करनी पड़ रही है। लेकिन जो हालत शाहजहांपुर जनपद के धान खरीद केंद्रों की है, वह कहीं की नहीं है। इसका कारण पूर्ण रूप से धान खरीद केंद्रों पर सत्ताधारी नेताओं की दखलनदरी, अधिकारियों की मनमानी और दलालों बिचौलियों की कबजेदारी मानी जा रही है। यही बजह है कि शाहजहांपुर जनपद के अधिकांश सेंटरों पर वह चाहे साधन सहकारी समिति, सहकारी संघ ,आरएफसी, पीसीयू या अन्य किसी खरीद एजेंसी के सेंटर हो। सभी पर किस ना किसी भाजपा नेता, जनप्रतिनिधि या उनके चाहते लोगों का दखल है।

नेताओं का दखल होने और नीचे से लेकर ऊपर तक कमीशन पहुंचने की वजह से इन खरीद सेंटरो पर वास्तविक किसानों का ध्यान खरीदने के बजाय दलालों, माफियाओं, बिचौलियों और राइस मिलर को बेचे गए धन को ही अपनी खरीद में शामिल कर भारी घोटाला किया जा रहा है। जबकि वास्तविक किसानों को सरकार की ओर से लगाये जा रहे इन धान खरीद सेंटरों पर सरकारी मूल्य का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। जिस वजह से ज्यादातर किसान अपना धान ओनेपौने दामों पर राइस मिल और बिचौलियों को माफियाओं के हाथ बिक्री कर रहे हैं।

बात चाहे सहकारी संघ, साधन सहकारी समितियों के साथ ही मंडी समिति में लगाए जाने वाले धान खरीद केंद्रों की हो। हर जगह बिचौलिए कब्जा किए बैठे हैं। किसानों को मिलने वाले लाभ का खुद फायदा उठाने के साथ ही अधिकारियों को कमीशन रूपी चढावा चढाकर मालामाल खुश कर रहे हैं। यही वजह है कि धान खरीद को लेकर शाहजहांपुर जनपद की पुवाया मंडी हो, बंडा मंडी हो, जलालाबाद हो या फिर रोजा मंडी। यहां पर काफी शोर गुल और हंगामा होने के बाद भी अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिससे सरकार, सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल होती जा रही है। सबसे ज्यादा उप मंडी बंडा में बिचौलियों का बोल वाला है।100 रुपए प्रति कुंतल कमीशन देने के बाद ही किसान अपना धन बेच पाते हैं।

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