भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान का जिलाधिकारी ने किया शुभारंभ

खबर सार :-
भैंसी नदी पुनरुद्धार अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अवसर पर, ज़िलाधिकारी ने कहा कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकताएँ हैं। क्षेत्र के सभी निवासियों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया जाता है।

भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान का जिलाधिकारी ने किया शुभारंभ
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुर: जनपद में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड बण्डा की ग्राम पंचायत नवादा ढाह से दलेलापुर धारा तक भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान का उद्घाटन जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही।

आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा स्वच्छ जल

जिलाधिकारी ने कहा कि भैंसी नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान भी है। वर्षों से उपेक्षा और जलस्रोतों के क्षरण के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन और जनता मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल नदी की सफाई और खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित जल और स्वच्छ पर्यावरण देने का संकल्प भी है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जनसहयोग से चलाए गए अभियान में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले थे। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बेहतर हुई और भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष अभियान को और व्यापक रूप दिया गया है।

ग्रामीणों ने दिया भरोसा

अभियान के अंतर्गत नदी की सफाई, गहरीकरण, अवैध अतिक्रमण हटाने और नदी किनारे पौधरोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों को जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर प्रयास करें तो सूखती नदियों को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है।

उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल का संरक्षण करने और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने में सहयोग करने की अपील की। ग्रामीणों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी का भरोसा दिलाया।

भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान क्षेत्र में जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल नदी में दोबारा प्राकृतिक जल प्रवाह स्थापित होगा, बल्कि किसानों और स्थानीय लोगों को भी इसका दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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