रामपुर: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और BJP के सीनियर नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां कहा कि जिस किसी की आस्था को वंदे मातरम से खतरा हो, जो आजादी के महान नायकों की बहादुरी, पराक्रम और राष्ट्रवादी जुनून से भरा है, वह राष्ट्रवाद के प्रति ईमानदार नहीं हो सकता।
नकवी ने रठौंडा में ऐतिहासिक किसान मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम का विरोध करके बंटवारे की भयावहता का जहर बोया, जिससे भारत का बंटवारा हुआ। अब समाज को ऐसी बांटने वाली मानसिकता से भरे सांप्रदायिक संक्रमण से सावधान रहना होगा। वंदे मातरम कोई धार्मिक गीत नहीं है, यह देश का राष्ट्रवादी गौरव है। किसी भी धर्म की आस्था से भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
नकवी ने कहा कि सुशासन और सनातन के अमृत के दौर में, सूडो-सेक्युलरिज़्म की अफीम का सांप्रदायिक नशा उतर रहा है। हमें संवैधानिक आस्था के सांप्रदायिक अपमान की सोच, पागलपन और साज़िश से उबरना होगा।
नकवी ने कहा कि सनातन संस्कृति खुद सेक्युलरिज़्म की देन है। अगर भारत में सनातन आस्था के लोग ज़्यादातर नहीं होते, तो सेक्युलरिज़्म के झंडे पर भी सांप्रदायिकता का हमला होता। वंदे मातरम के मूल्यों, संकल्प और सोच ने भारत को "संवैधानिक सेक्युलरिज़्म का सिकंदर और लोकतंत्र का पुरोधा" बनाया है, जहाँ सत्ता गोलियों से नहीं, बल्कि लड़ाई से तय होती है।
नकवी ने कहा कि आज़ादी का अमृत काल यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड पर संवैधानिक गाइडलाइंस अपनाने का मौका है। यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड पूरे देश के लिए है, किसी खास धर्म के लिए नहीं। "एक देश, एक कानून" देश और सभी धर्मों के लिए एक आसान, सुलभ और सबको साथ लेकर चलने वाले सिस्टम के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड धार्मिक आस्था की रक्षा करेगा और कानूनी सिस्टम को आसान बनाएगा।
नकवी ने आज कहा कि भारत में सेक्युलरिज़्म, मेजोरिटी कम्युनिटी के संकल्प, सोच और कल्चर का नतीजा है। आज़ादी के बंटवारे के बाद बने भारत के हिंदू मेजोरिटी ने सेक्युलरिज़्म का रास्ता चुना, जबकि मुस्लिम मेजोरिटी वाले पाकिस्तान ने एक इस्लामिक देश का झंडा फहराया। भारतीय संविधान की सबको साथ लेकर चलने वाली और सबको साथ लेकर चलने वाली सोच, मेजोरिटी कम्युनिटी के मूल्यों, संकल्प और कल्चर का नतीजा है। संविधान की सबको साथ लेकर चलने वाली ताकत को कम्युनलिज़्म के राजनीतिक खतरे से बंधक नहीं बनाया जा सकता।
नकवी ने कहा कि बंटवारे की भयावहता के बाद, भारतीय संविधान और पाकिस्तानी संविधान लगभग एक साथ बने थे। भारतीय संविधान सनातनियों और 1.45 अरब भारतीयों की छत्रछाया में एक सुरक्षित और मज़बूत सबको साथ लेकर चलने वाले सफ़र पर कामयाबी से आगे बढ़ रहा है। जबकि, इस्लामिक देश पाकिस्तान का संविधान कट्टरपंथियों के कम्युनल दलदल में कैद होकर आतंकवाद की टकसाल और खजाने का बंधक बन गया है।
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