पंचायत चुनाव में देरी पर प्रधानों का प्रदर्शन, अंतरिम जिम्मेदारी की उठाई मांग

खबर सार :-
सोमवार को पीलीभीत में बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान 'राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन' के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट (DM) को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

पंचायत चुनाव में देरी पर प्रधानों का प्रदर्शन, अंतरिम जिम्मेदारी की उठाई मांग
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः पीलीभीत में सोमवार को राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी (डीएम) को सौंपा।

अनुच्छेद 243 का हवाला

संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. सत्यपाल शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाते हैं, तो वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही अंतरिम अवधि के लिए “प्रशासकीय दायित्व” सौंपा जाना चाहिए। प्रधानों का कहना है कि इससे गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक शून्यता की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

ज्ञापन में अनुच्छेद 243 का हवाला देते हुए बताया गया कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी कारणवश, जैसे पिछड़ा वर्ग आरक्षण या अन्य तकनीकी अड़चनों के चलते चुनाव में देरी होती है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

प्रधानों ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति संविधान की भावना और स्थानीय स्वशासन के सिद्धांत के विपरीत है। उनका कहना है कि इससे ग्राम स्तर पर जनता की भागीदारी कमजोर होती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है।

बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राम प्रधान

ज्ञापन में यह मांग भी रखी गई कि जब तक नए पंचायत चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक ग्राम प्रधानों को विकास कार्यों के संचालन और वित्तीय अधिकारों के उपयोग की अनुमति दी जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं और परियोजनाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रधानों ने अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस प्रकार की स्थिति में निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी जाती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से भी इसी तरह का निर्णय लेने की मांग की।

इस दौरान जिला प्रभारी रामपाल सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्ष और बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे।

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