नगर पालिका अध्यक्ष पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, डीएम से मांगी गई रिपोर्ट

खबर सार :-
पीलीभीत नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष आस्था अग्रवाल पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। सभासदों की शिकायत पर शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। हाउस टैक्स में कथित हेराफेरी, फर्जी हस्ताक्षर से भुगतान, ठेकों में घोटाला और परिजनों द्वारा अवैध हस्तक्षेप जैसे आरोप सामने आए हैं। जिलाधिकारी से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।

नगर पालिका अध्यक्ष पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, डीएम से मांगी गई रिपोर्ट
खबर विस्तार : -

पीलीभीत म्युनिसिपल काउंसिल में करप्शन और फाइनेंशियल गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं। म्युनिसिपल चेयरपर्सन आस्था अग्रवाल और उनके परिवार पर पावर का गलत इस्तेमाल करने और सरकारी पैसे के गबन का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है।

जिलाधिकारी से मांगी गई रिपोर्ट

पार्षदों की शिकायत के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार के अंडर सेक्रेटरी संजय कुमार तिवारी ने पीलीभीत के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को डिटेल में जांच करने और तुरंत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। म्युनिसिपल काउंसिलर रत्ना शुक्ला और दूसरे पार्षदों ने सबूतों के साथ शिकायत दी, जिसमें करप्शन के कई मामले बताए गए।

शिकायत के मुताबिक, म्युनिसिपल चेयरपर्सन पर अपने ससुर के वी-मार्ट शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का हाउस टैक्स गैर-कानूनी तरीके से ₹52,000 से घटाकर ₹30,000 करने का आरोप है। इससे सीधे तौर पर सरकारी रेवेन्यू का नुकसान हुआ।

कई आरोप आए सामने

एक और आरोप यह है कि 7 अगस्त, 2025 को, जब चेयरपर्सन दिल्ली में थीं, तो उनके पति आशीर्वाद अग्रवाल ने उनके नकली साइन किए और लगभग ₹2 करोड़ के पेमेंट बिल (सैलरी, पेंशन, वगैरह) पास कर दिए। डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।

नेहरू एनर्जी पार्क के ब्यूटीफिकेशन के लिए ₹1.97 करोड़ और नालों के कंस्ट्रक्शन के लिए ₹9 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में घटिया मटीरियल इस्तेमाल होने का आरोप है। इसके अलावा, ₹4 करोड़ की लाइटिंग की खरीद में फाइनेंशियल गड़बड़ियों का आरोप है।

चेयरपर्सन के पति और भाई सचिन अग्रवाल पर नगर निगम के काम में गैर-कानूनी दखल देने और कॉन्ट्रैक्टर्स से कमीशन वसूलने का आरोप है। जलकल डिपार्टमेंट में खराब जनरेटर के नाम पर डीजल खर्च में धोखाधड़ी और आउटसोर्स कर्मचारियों के PF और EPF बैलेंस में बड़े पैमाने पर गबन के भी दावे किए गए हैं। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को तुरंत कार्रवाई करने और जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

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