पीलीभीतः जिले के बरखेड़ा क्षेत्र में एक पत्रकार के साथ कथित धोखाधड़ी, सूदखोरी और जान से मारने की धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पत्रकार हरिशंकर शर्मा ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी सराफा व्यापारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, हरिशंकर शर्मा ने स्थानीय सराफा व्यापारी “जय मां काली ज्वेलर्स उर्फ कमलेश चांदी वाले” के यहां लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण गिरवी रखे थे। आरोप है कि व्यापारी ने गहने गिरवी रखते समय न तो कोई रसीद दी और न ही बाद में गहनों को वापस किया। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने व्यापारी पर भरोसा करते हुए यह लेन-देन किया था, लेकिन अब उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत में व्यापारी कमलेश गुप्ता और उनके पुत्र अमित गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित के मुताबिक, जब उन्होंने गहनों की रसीद मांगी, तो आरोपियों ने साफ इनकार कर दिया। कथित तौर पर उन्होंने कहा कि “रसीद देंगे तो टैक्स देना पड़ेगा, और उनके पास लाइसेंस भी नहीं है।” इस बयान के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि इससे टैक्स चोरी और अवैध व्यापार की आशंका भी सामने आती है।
इसके अलावा, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि संबंधित व्यापारी ग्राहकों को कम कैरेट का सोना ऊंची कीमत पर बेचता है और जीएसटी बिल भी नहीं देता। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि कर नियमों की भी अनदेखी है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब पत्रकार ने अपने गहने वापस मांगे। आरोप है कि व्यापारी ने गहने लौटाने के लिए अत्यधिक ब्याज की मांग की। पीड़ित का दावा है कि उन्होंने लगभग 2 लाख 12 हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया, इसके बावजूद उन्हें उनके गहने वापस नहीं मिले। इसके उलट उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़ित ने आरोपी व्यापारी के पुत्र पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने खुद को राजनीतिक पहुंच वाला बताते हुए उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया। इस घटना के बाद पीड़ित और उनका परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है।
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पहले ही 26 मार्च को थाना बरखेड़ा में और 30 मार्च को पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद जब कोई प्रगति नहीं हुई, तो उन्होंने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल कानून व्यवस्था की स्थिति को उजागर करेगा, बल्कि अवैध सराफा कारोबार पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा। स्थानीय लोग भी इस मामले में पारदर्शी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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