मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे से ग्रामीणों में रोष, सख्त कार्रवाई की मांग

खबर सार :-
गांव के लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल से जुड़ी भूमि पर कब्जा होना केवल कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की आस्था से भी जुड़ा हुआ विषय है। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई करे। यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं किया गया तो गांव में तनाव की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे से ग्रामीणों में रोष, सख्त कार्रवाई की मांग
खबर विस्तार : -

पीलीभीत: प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर सरकार लगातार अपने इरादे स्पष्ट करती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि सरकारी जमीन, ग्राम समाज की भूमि और धार्मिक स्थलों से जुड़ी जमीनों पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को समय-समय पर निर्देश भी दिए जाते रहे हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए। लेकिन जनपद पीलीभीत में सामने आए एक मामले ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मंदिर से जुड़ी बताई जा रही जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

विरोध के बाद भी हो रहा निर्माण

यह मामला बीसलपुर तहसील के बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्थित ग्राम समाज की एक जमीन, जिसे स्थानीय लोग मंदिर से जुड़ी भूमि बताते हैं, उस पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि पहले जमीन पर कब्जा किया गया और उसके बाद जल्दबाजी में वहां पक्का मकान बनाकर खड़ा कर दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य इतनी तेजी से कराया गया कि आसपास रहने वाले लोगों को इसका विरोध करने का मौका तक नहीं मिला। जब तक गांव के लोगों को पूरी तरह से जानकारी हुई, तब तक मकान का काफी हिस्सा बन चुका था। इसके बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू किया और प्रशासन से शिकायत करने का फैसला लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और किसी ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की।

लेखपाल आदर्श गंगवार ने मौके पर पहुंचकर की जांच

गांव के लोगों का कहना है कि यह जमीन लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ी मानी जाती रही है। ग्रामीण इसे मंदिर की भूमि बताते हैं और कहते हैं कि गांव के लोग वर्षों से इसे धार्मिक स्थल के रूप में सम्मान देते आए हैं। ऐसे में जब इस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो गांव के लोगों में नाराजगी फैल गई। कई ग्रामीणों ने मिलकर प्रशासन और राजस्व विभाग से शिकायत करते हुए पूरे मामले की जांच कराने और जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की।

शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग की ओर से हल्का लेखपाल आदर्श गंगवार मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मौजूदगी में जमीन की नाप कराई गई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिस स्थान पर निर्माण हुआ है, वह किस श्रेणी की भूमि में आता है। नाप के दौरान सामने आया कि जिस स्थान पर मकान बनाया गया है, वह मंदिर से जुड़ी भूमि के दायरे में आ रहा है।

लेखपाल आदर्श गंगवार ने बताया कि नाप के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित कानूनगो को भेज दी गई है। उनके अनुसार अब आगे की कार्रवाई राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा नियमानुसार की जानी है। हालांकि रिपोर्ट भेजे जाने के बाद कई दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक न तो निर्माण कार्य को रुकवाया गया है और न ही कब्जा करने वालों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है।

सख्त कार्रवाई की मांग

इसी बात को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि जब राजस्व विभाग की नाप में ही यह बात सामने आ चुकी है कि जमीन मंदिर से संबंधित है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो इससे अवैध कब्जों को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में ऐसे मामले और भी बढ़ सकते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द हस्तक्षेप किया जाए और मंदिर से जुड़ी बताई जा रही जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति नियमों के विरुद्ध जमीन पर कब्जा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।

फिलहाल पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों की नजर प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारी जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाएंगे और मंदिर से जुड़ी बताई जा रही जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा, ताकि गांव में शांति और सौहार्द बना रहे।
 

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