Pilibhit : बरखेड़ा में अवैध पेड़ कटान का आरोप, सूचना के बाद भी नहीं हुआ एक्शन, उठे सवाल

खबर सार :-
पीलीभीत ज़िले में पेड़ों की अवैध कटाई बेरोकटोक जारी है, लकड़ी माफ़िया वन विभाग से बिना किसी अनुमति के हरे-भरे पेड़ों पर लगातार आरी चला रहा है। बरखेड़ा क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई लगातार हो रही है; फिर भी, सूचित किए जाने के बाद भी, वन विभाग कोई कार्रवाई करने में विफल रहा है।

Pilibhit : बरखेड़ा में अवैध पेड़ कटान का आरोप, सूचना के बाद भी नहीं हुआ एक्शन, उठे सवाल
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में अवैध पेड़ कटान का मामला सामने आया है, जहां बरखेड़ा क्षेत्र में लकड़ी माफिया द्वारा लगातार हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग को सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

विभाग की भूमिका पर सवाल

मामला पीलीभीत के ब्लॉक बरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम अर्शिया भोज का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, चार दिन पहले गांव में तीन अलग-अलग प्रजातियों के विशाल हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कथित लकड़ी माफिया कमरुद्दीन द्वारा इस कटान को अंजाम दिया गया। इसके बावजूद वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी, जिससे विभाग की भूमिका पर संदेह जताया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं और हरे-भरे पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग की मिलीभगत के बिना इस तरह खुलेआम पेड़ कटान संभव नहीं है।

ग्रामीणों में नाराजगी

बताया गया कि करीब चार दिन पहले दौलतपुर मार्ग, जो मधपुरी की ओर जाता है, वहां भी तीन हरे-भरे जामुन, शीशम और गूलर के पेड़ों को काट दिया गया था। जिस दिन पेड़ों का कटान हो रहा था, उसी दिन वन विभाग में तैनात कर्मचारी को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। चार दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

कार्रवाई का आश्वासन

मामले को लेकर आज डीएफओ भरत कुमार को अवगत कराया गया। इस पर उन्होंने कहा कि पेड़ कटान का मामला पहले उनके संज्ञान में नहीं था और आज ही उन्हें इसकी जानकारी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवैध कटान की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वन विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा। फिलहाल, ग्रामीण प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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