वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना: बुंदेलखंड के व्यंजन चयन पर बनी सहमति की राह अभी अधूरी

खबर सार :-
वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना के तहत बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन चयन पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। जानिए योजना की स्थिति, संभावनाएं और विशेषज्ञों की राय।

वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना: बुंदेलखंड के व्यंजन चयन पर बनी सहमति की राह अभी अधूरी
खबर विस्तार : -

झांसी: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और पाक परंपराओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना के माध्यम से सरकार का उद्देश्य हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को राज्य, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। हालांकि, बुंदेलखंड क्षेत्र में इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया अभी शुरुआती उलझनों में फंसी नजर आ रही है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों में से किसी एक को चुनने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी क्रम में लघु उद्योग मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने हाल ही में झांसी पहुंचकर विश्वविद्यालय और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ चर्चा की। बैठक में रसगुल्ला, बालूशाही, बर्फी और बेड़ई जैसे व्यंजनों के नाम सामने आए, लेकिन इनका बुंदेली सांस्कृतिक आधार कमजोर होने के कारण विशेषज्ञों में एक राय नहीं बन सकी। यही कारण है कि योजना के अंतर्गत अब तक किसी भी व्यंजन का औपचारिक चयन नहीं हो पाया है। 

बुंदेलखंड की ग्रामीण संस्कृति में आज भी ऐसे कई पारंपरिक व्यंजन का प्रचलन 

बुंदेलखंड की ग्रामीण संस्कृति में आज भी ऐसे कई पारंपरिक व्यंजन प्रचलन में हैं, जो पीढ़ियों से विशेष अवसरों पर बनाए जाते रहे हैं। इनमें लापसी, सक्सा, कनकौआ का साग, गेहूं के मीठे चीले, फुलौरी, भुज कड़ी, ज्वार के पापड़, नमकीन खुरमी, बेसन के लड्डू, सूजी का हलवा, रसखीर, बिररा की रोटी, कमल ककड़ी कबाब, गुलगुला, आठवाइ, बरा और फरा जैसे व्यंजन शामिल हैं। ये सभी व्यंजन न केवल स्थानीय अनाज और जलवायु से जुड़े हैं, बल्कि बुंदेलखंड की जीवनशैली और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल के निदेशक डॉ. सुनील काबिया का मानना है कि वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दे सकती है। उन्होंने बताया कि इस योजना में झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर और महोबा जिलों को शामिल किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किस जिले से कौन सा व्यंजन चुना जाए, इस पर गहन विचार-विमर्श जारी है ताकि चयन पूरी तरह प्रामाणिक और क्षेत्रीय पहचान के अनुरूप हो। 

योजना में मिलेट्स को शामिल करने का प्रस्ताव

इस योजना में मिलेट्स (श्रीअन्न) को शामिल करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। जिला कृषि अधिकारी कुलदीप कुमार मिश्रा के अनुसार, उद्योग प्रोत्साहन विभाग के माध्यम से यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यदि मिलेट्स को योजना में शामिल किया जाता है, तो इससे न केवल इसकी खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मिलेट्स से बने कुकीज़, केक और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के नए अवसर भी खुलेंगे। हालांकि, फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन योजना बुंदेलखंड के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी एक व्यंजन पर सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही चयन होने पर यह योजना क्षेत्रीय रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण का मजबूत आधार बनेगी।

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