प्रशासन का दावा 'स्टॉक पर्याप्त', पूर्ति विभाग की चुप्पी से गहराया भ्रम: तेल लेने के लिए मची आपाधापी

खबर सार :-
झाँसी शहर में इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की कमी को लेकर अफ़वाहें तेज़ी से फैल रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, जनता के बीच घबराहट और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है, लोग डीज़ल और पेट्रोल खरीदने के लिए दौड़-भाग कर रहे हैं।

प्रशासन का दावा 'स्टॉक पर्याप्त', पूर्ति विभाग की चुप्पी से गहराया भ्रम: तेल लेने के लिए मची आपाधापी
खबर विस्तार : -

झांसी: महानगर में इन दिनों ईंधन को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर यह भ्रामक संदेश तेजी से फैलाया जा रहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी होने वाली है। इन अफवाहों का असर अब साफ तौर पर झांसी शहर में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों में ईंधन भरवाने की होड़ मच गई है और पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है।

स्थिति यह हो गई है कि जो लोग आमतौर पर अपनी बाइक में ₹100 का पेट्रोल भरवाते थे, वे अब पूरी टंकी फुल करवा रहे हैं। चार पहिया वाहन चालक भी जरूरत से ज्यादा ईंधन लेने में जुटे हैं। इस अचानक बढ़ी मांग के कारण शहर में पेट्रोल और डीजल की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुनी से अधिक हो गई है।

अचानक मांग बढ़ने से बढ़ी परेशानी

आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन करीब 500 किलोलीटर पेट्रोल की बिक्री होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 900 किलोलीटर तक पहुंच गया है। झांसी में इंडियन ऑयल के करीब 75 पेट्रोल पंप हैं, जहां पहले प्रतिदिन लगभग 300 KL पेट्रोल की बिक्री होती थी, जो पिछले तीन दिनों में बढ़कर 550 KL तक पहुंच गई है। इसी तरह भारत पेट्रोलियम के करीब 50 पेट्रोल पंपों पर पहले जहां 200 KL पेट्रोल की बिक्री होती थी, वह अब बढ़कर 350 KL तक हो गई है।

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि इस अचानक बढ़ी मांग से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को हालात इतने बिगड़ गए कि कई पंप संचालकों को वितरण सीमित करना पड़ा। दोपहिया वाहनों को ₹100 तक और चारपहिया वाहनों को ₹200 से ₹500 तक का ही पेट्रोल देने का निर्णय लिया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।

हालांकि, इस दौरान कई स्थानों पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली। किसान और अन्य लोग बड़े-बड़े जरीकेन और ड्रम लेकर पेट्रोल भरवाने पहुंचे, जिससे पंप संचालकों के साथ उनकी नोकझोंक हो गई। कई जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में भी कठिनाई हुई।

पूर्ति विभाग की चुप्पी भी कर रही परेशान

विशेषज्ञों और तेल कंपनियों के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले महीनों तक आपूर्ति में किसी तरह की बाधा की संभावना नहीं है। सरकार और संबंधित विभागों ने भी इन अफवाहों का खंडन करते हुए जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करें।

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरों का असर कम नहीं हो रहा है। पुलिस प्रशासन अब तक ऐसे मैसेज फैलाने वालों की पहचान नहीं कर पाया है, जिससे अफवाहों को और बल मिल रहा है। इस स्थिति में पूर्ति विभाग की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। विभाग के अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं, जिससे आम जनता की शंकाओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

पेट्रोल पंपों की जांच के लिए बनाई गई टीम की गतिविधियों पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जांच कहां और कैसे की जा रही है। ऐसे में लोगों के बीच असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है।

अगर समय रहते प्रशासन ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की और सही जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचाई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में जागरूकता और त्वरित सूचना ही सबसे बड़ा समाधान है। जनता से अपील की जा रही है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट खबर को आगे न बढ़ाएं।
 

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