श्रीगंगानगर में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने की। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने तथा हाईवे पर आवश्यक सुधार कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
जिला कलक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्ग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि वे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का संयुक्त रूप से दिन एवं रात्रि के समय सर्वे करें और जहां आवश्यकता हो वहां साइन बोर्ड, रम्बल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टर तथा चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। विशेष रूप से एनएच-62 महियांवाली रोड पर रम्बल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टर थर्मोप्लास्टिक और चेतावनी बोर्ड शीघ्र लगाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
उन्होंने नगर परिषद एवं स्थानीय निकाय अधिकारियों को हाईवे से आवारा पशुओं को हटाकर नजदीकी गौशालाओं में भिजवाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के केंद्र बिंदु से 75 मीटर के भीतर अवैध रूप से निर्मित वाणिज्यिक निर्माणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में तत्काल सर्वे करने को कहा गया।
जिला कलक्टर ने कहा कि ऐसे पेड़ों को चिन्हित किया जाए जो यातायात में बाधा बन रहे हैं या दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। उन्होंने वन विभाग से समन्वय कर नियमानुसार पेड़ों की कटाई एवं शाखाओं की छंटाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि कार्य के दौरान यातायात व्यवस्था बाधित न हो और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को सात दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पुलिस एवं परिवहन विभाग को बिना हेलमेट वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग तथा ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। सुबह के समय गश्त और चेकिंग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। नगर विकास न्यास को रोडवेज एवं निजी बस स्टैंड को एक ही स्थान पर एकीकृत करने के लिए भूमि आवंटन और तकनीकी संभावनाओं की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया।
जिला कलक्टर ने सड़क दुर्घटनाओं के “गोल्डन ऑवर” में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एनएचएआई एवं चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि सभी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को सात दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाए। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में तुरंत सहायता के लिए “112” हेल्पलाइन के उपयोग पर भी जोर दिया गया।
बैठक में हरीशंकर, रीना, डॉ. अजय सिंगला, मंगत सेतिया, सुरेन्द्र पूनिया एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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