Action on Terror Link: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। आतंकी संगठनों से कथित संबंधों के आरोप में पांच सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इन कर्मचारियों पर आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, पनाह, फंड और संवेदनशील जानकारी देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इश्तियाक, लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद शाह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी के खिलाफ जांच एजेंसियों के पास ठोस सबूत मौजूद थे।
मोहम्मद इश्तियाक को पहले रेहबर-ए-तालीम के तहत शिक्षक नियुक्त किया गया था और 2013 में उसे स्थायी किया गया। जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था। वह लश्कर के कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के नियमित संपर्क में था, जिसे भारत सरकार ने व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर रखा है। अप्रैल 2022 में पुलिस ने उसे एक आतंकी वारदात को अंजाम देने से पहले गिरफ्तार कर लिया था।
लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद राह को 2011 में संविदा पर नियुक्त किया गया था और 2016 में उसे अनंतनाग के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल बिजबेहरा में स्थायी किया गया। जांच में पता चला कि वह हिजबुल मुजाहिदीन के प्रभाव में था। उसने अपने चाचा अमीन बाबा, जो बाद में आतंकवादी निकला, को रहने की सुविधा दी और अटारी-वाघा बॉर्डर तक पहुंचाने में मदद की। अमीन बाबा बाद में पाकिस्तान पहुंचकर आतंकियों को प्रशिक्षण देने लगा।
सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर 1988 में पीएचई विभाग में शामिल हुआ था। जांच में खुलासा हुआ कि वह गुरेज और बांदीपोरा इलाके में लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय ऑन-ग्राउंड वर्कर था। वह आतंकियों को पनाह, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा बलों की मूवमेंट की जानकारी देता था। सितंबर 2021 में उसके घर पर छापेमारी के दौरान दो आतंकवादी मारे गए और हथियार बरामद हुए, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट पर हिजबुल मुजाहिदीन की मदद करने का आरोप है। उसने सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर चेकपोस्टों को पार किया और आतंकवादी अमीन बाबा को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचाने में सहायता की। जांचकर्ताओं के अनुसार, उसने आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ 2009 से सेवा में था। जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान स्थित हिजबुल मुजाहिदीन हैंडलर बशीर अहमद भट के संपर्क में था। उसने अपनी आधिकारिक स्थिति का इस्तेमाल कर हथियारों की खरीद, फंड ट्रांसपोर्ट और आतंकियों तक संदेश पहुंचाने में मदद की। जुलाई 2024 में पुलिस ने उसके वाहन से हथियार, ग्रेनेड और पांच लाख रुपये नकद बरामद किए थे।
सरकार ने साफ किया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे तत्वों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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