झांसी: देश के भीतर बैठे कुछ गद्दार और शातिर दिमाग अपराधी किस तरह विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं, इसका एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश की झांसी पुलिस ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो देश के भोले-भले लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जाल में फंसाकर प्रतिदिन करोड़ों रुपयों का चूना लगा रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बीबीजीटीएस मूर्ती के कुशल निर्देशन में प्रेमनगर थाना पुलिस को यह अभूतपूर्व सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने घेराबंदी करके इस गिरोह के 7 मुख्य गुर्गों को दबोच लिया है, जबकि गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड समेत 3 आरोपी अब भी कानून की गिरफ्त से दूर हैं।
पुलिस को काफी समय से झांसी और आस-पास के इलाकों में सक्रिय एक बड़े Online Gaming Fraud Group के बारे में खुफिया जानकारियां मिल रही थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए प्रेमनगर थाना प्रभारी और उप-निरीक्षक (एसआई) रविकांत शुक्ला की टीम ने गुलाम गौस खां मार्ग पर स्थित कच्चे पुल के पास अचानक छापेमारी की। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से वहां मौजूद अपराधियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने मौके से 7 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान रागिब अहमद, सनी अमराया, सोहिल खान, अनुभव सिंह, दानिश खान उर्फ नूर, सौरभ विश्वकर्मा और देवेश कुमार गौतम के रूप में हुई है। पुलिस ने जब इनकी जामा तलाशी ली, तो इनके पास से 8 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, 1 चालू सिम कार्ड, 1 बैंक चेकबुक और 4 विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद हुए।
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस की टेक्निकल टीम ने आरोपियों के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की गहन फोरेंसिक जांच और डेटा विश्लेषण किया, तो पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए। इन उपकरणों के भीतर बड़े पैमाने पर Cyber Financial Fraud, फर्जी नामों पर खुले बैंक खातों के बेजा इस्तेमाल, अवैध यूपीआई आईडी (UPI ID) के निर्माण, अवैध नेट बैंकिंग संचालन और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों को देश से बाहर भेजने के पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मिले।
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि इस पूरे गिरोह का मुख्य संचालक (मास्टरमाइंड) ध्रुव नाम का व्यक्ति है, जो मध्य प्रदेश के इंदौर का रहने वाला है। ध्रुव सीधे तौर पर चीनी वेबसाइटों और अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में था और वहीं से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिराना और पूरी तरह Organized Cyber Crime Group की तरह था। गिरोह का एक मुख्य सदस्य रागिब अहमद, भारत में बैठकर इंडोनेशिया के वर्चुअल और इंटरनेशनल सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। वह इन विदेशी नंबरों के जरिए अलग-अलग गरीब या लालची लोगों से उनके बैंक खातों की जानकारी, यूपीआई और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स हासिल करता था। इसके बाद इन खातों का पूरा कंट्रोल एक विदेशी व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से सीधे इंदौर बैठे मुख्य संचालक ध्रुव तक पहुंचा दिया जाता था।
यह गिरोह इंटरनेट पर '1 BET' और 'Casino' जैसी बेहद लोकप्रिय लेकिन खतरनाक Online Gaming Fraud Group साइटों के माध्यम से लोगों को रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाता था। शुरुआत में लोगों को थोड़ा मुनाफा देकर अधिक लालच दिया जाता था, जिसके बाद लोग गेमिंग प्लेटफॉर्म पर रिचार्ज करने और भारी मात्रा में डिजिटल पॉइंट्स खरीदने के लिए मजबूर हो जाते थे। इस तरह Cyber Financial Fraud के जरिए जुटाई गई करोड़ों रुपये की अवैध धनराशि को गिरोह द्वारा पहले से तैयार रखे गए देश के विभिन्न बैंक खातों में जमा कराया जाता था।
झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस गिरोह के ट्रांजेक्शन पैटर्न का विश्लेषण करते हुए एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अपराधी पुलिस और साइबर सेल की ट्रैकिंग से बचने के लिए दो अलग-अलग रणनीतियों पर काम करते थे:
500 रुपये से अधिक की राशि: जिन बैंक खातों में 500 रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की राशि आती थी और जिन पर पीड़ित द्वारा तुरंत शिकायत दर्ज करा दी जाती थी, शातिर अपराधी उस राशि को तुरंत गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जीतने वाले दूसरे आम खिलाड़ियों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इसका नतीजा यह होता था कि पुलिस की जांच में उन बेकसूर खिलाड़ियों के खाते फ्रीज या लीन (Hold) हो जाते थे, और असली अपराधी बैकग्राउंड में सुरक्षित बच निकलते थे।
500 रुपये से कम की राशि: जिन ट्रांजेक्शन की राशि 500 रुपये से कम होती थी, उनकी शिकायतें आमतौर पर लोग थानों में दर्ज नहीं कराते थे क्योंकि रकम छोटी होती थी। ऐसे पैसों को ट्रैक करना भी बेहद पेचीदा होता था। गिरोह इन छोटे-छोटे करोड़ों ट्रांजेक्शन्स को विभिन्न फर्जी बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर अंत में 'USDT' (एक प्रकार की स्टेबल क्रिप्टोकरेंसी) में बदल देता था। इसके बाद इस डिजिटल करेंसी को विदेशों में बैठे आकाओं को भेज दिया जाता था और स्थानीय एजेंटों को उनका मोटा कमीशन मिल जाता था।
जब पुलिस ने इस नेटवर्क के वित्तीय साम्राज्य को खंगाला तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि पिछले महज 25 दिनों के भीतर इस गिरोह ने 19 बैंक खातों के जरिए लगभग 4 करोड़ 35 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया है। इसके अलावा, चीन की विवादित वेबसाइट 'CESHI.TTTPYM.Com' के माध्यम से लगभग 38 करोड़ रुपये मूल्य के विशाल वित्तीय लेनदेन का पता चला है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस Cyber Financial Fraud से जुड़े कुल 114 बैंक खातों की पहचान की है और वर्तमान में विभिन्न खातों में मौजूद 4 करोड़ 35 लाख 64 हजार रुपये की धनराशि को पूरी तरह से फ्रीज (होल्ड) करवा दिया है। साथ ही खातों में मौजूद 529 USDT और करीब 37.20 लाख मूल्य के डिजिटल एसेट्स को भी ब्लॉक कर दिया गया है।
इस पूरे मामले में गिरोह के तीन मुख्य स्तंभ हर्ष, ध्रुव (इंदौर) और सलाम अभी भी फरार चल रहे हैं। पुलिस की कई टीमें इनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस इनके पूरे आर्थिक नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय लिंक की गहराई से तफ्तीश कर रही है। एसएसपी ने इस बेहद संवेदनशील और बड़े मामले का पर्दाफाश करने वाली प्रेमनगर पुलिस टीम के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) रविकांत शुक्ला की पीठ थपथपाई है और उन्हें विशेष प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है।
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