UP Mining Syndicate: सीएम योगी की डांट भी बेअसर! पीलीभीत में खाकी और हाकिमों की नाक के नीचे 'पाताल' चीर रहे खनन माफिया, NH-730 पर दौड़ रहे 'यमराज'

खबर सार :-
पीलीभीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त फटकार के बाद भी अवैध खनन का धंधा धड़ल्ले से जारी है। गजरौला में जेसीबी से खोदी जा रही धरती और एनएच-730 पर दौड़ते ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं।
UP Mining Syndicate: सीएम योगी की डांट भी बेअसर! पीलीभीत में खाकी और हाकिमों की नाक के नीचे 'पाताल' चीर रहे खनन माफिया, NH-730 पर दौड़ रहे 'यमराज'
खबर विस्तार : -

Illegal Mining in Pilibhit : सूबे में कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ जिलों में प्रशासनिक शिथिलता सरकार की साख पर बट्टा लगा रही है। ताजा और सबसे हैरान करने वाला मामला पीलीभीत जनपद (Pilibhit District) से सामने आया है। पीलीभीत में Illegal Mining in Pilibhit (पीलीभीत में अवैध खनन) की लगातार मिल रही शिकायतों और मीडिया में खबरें सुर्खियां बनने के बाद खुद मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के दौरान जिले के शीर्ष अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर नाराजगी जताते हुए जिला अधिकारी (District Magistrate) ज्ञानेंद्र सिंह और खनन अधिकारी (Mining Officer) सुभाष कुमार को आड़े हाथों लिया और जिले में तत्काल प्रभाव से अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाने के कड़े निर्देश दिए। लेकिन हकीकत यह है कि सूबे के मुखिया के इन तीखे तेवरों का भी स्थानीय तंत्र पर कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।

मुख्यमंत्री की इस सख्त फटकार और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दी गई चेतावनी के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। पीलीभीत के थाना गजरौला क्षेत्र (Gajraula Police Station Area) में माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वहां पाबंदी के बावजूद दिन-रात बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मिट्टी और बालू का उठान किया जा रहा है। Illegal Mining in Pilibhit का आलम यह है कि स्थानीय लोगों के मुताबिक, गजरौला इलाके में सुबह की पहली किरण से लेकर रात के आठ बजे तक बेखौफ होकर जेसीबी मशीनें (JCB Machines) चलाई जा रही हैं। खनन माफिया (Mining Mafia) बिना किसी डर के धरती का सीना चीर रहे हैं और नियमों को ताक पर रखकर दर्जन भर से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों (Tractor-Trolleys) के जरिए इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

राजमार्ग पर सुबह से लेकर शाम तक ट्रैक्टर-ट्रॉली यमराज बनकर दौड़ रहे

सबसे ज्यादा डरावनी और चिंताजनक स्थिति नेशनल हाईवे 730 (National Highway 730) पर देखने को मिलती है। इस व्यस्त राजमार्ग पर सुबह से लेकर शाम तक बिना तिरपाल ढके, आकंठ ओवरलोड (Overloaded) मिट्टी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली यमराज बनकर दौड़ रहे हैं। राहगीरों के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं रह गया है, लेकिन सड़क पर गश्त करने वाली पुलिस इन डंपरों और ट्रैक्टरों को देखकर भी अपनी आंखें मूंदे रहती है। इस लापरवाही के चलते Illegal Mining in Pilibhit की इस समस्या ने अब एक बड़े हादसे की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है।

दिलचस्प बात यह है कि जब सोशल मीडिया और विशेष रूप से एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस अवैध धंधे का भंडाफोड़ किया गया, तो पीलीभीत पुलिस (Pilibhit Police) ने बेहद सधे हुए अंदाज में ट्वीट कर जनता को आश्वासन दिया। पुलिस प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि संबंधित थाना प्रभारी (Station House Officer) और राजस्व विभाग (Revenue Department) के जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। परंतु, यह सरकारी आश्वासन सिर्फ डिजिटल फाइलों और सोशल मीडिया की टाइमलाइन तक ही सीमित रह गया। अगली सुबह होते ही गजरौला के उसी इलाके में फिर से जेसीबी गर्जने लगीं और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का रेला सड़कों पर उतर आया। इस खुलेआम हो रहे खेल से साफ है कि पुलिस का आश्वासन केवल कागजी खानापूर्ति था, जिसका मकसद महज जनता और शासन के गुस्से को शांत करना था और वहां Illegal Mining in Pilibhit का गोरखधंधा दोबारा चालू हो गया।

कई बार हुई शिकायत पर नहीं हो रही कार्रवाई

इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं होता। स्थानीय सजग नागरिकों और पीड़ितों ने गजरौला क्षेत्र में चल रहे इस अवैध धंधे की सीधी शिकायत सीधे उप-जिलाधिकारी (Sub-Divisional Magistrate) यानी सदर एसडीएम और खुद जिला अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के सरकारी सीयूजी (CUG) नंबर पर दर्ज कराई। फोन पर बातचीत के दौरान एसडीएम सदर ने हमेशा की तरह त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया और कहा कि वे तुरंत अपनी टीम को मौके पर भेज रहे हैं। इसके बाद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो सीधे जिलाधिकारी के सीयूजी नंबर पर शिकायत भेजी गई। इस वीआईपी शिकायत के बाद भी मौके पर एक मिनट के लिए भी पहिया नहीं थमा और Illegal Mining in Pilibhit बेरोकटोक जारी रहा। माफिया बिना किसी बाधा के खेतों से लगातार मिट्टी उठाकर बड़े-बड़े कमर्शियल प्लॉटों का पटान (Plot Plotting) करने में व्यस्त रहे। इस बेफिक्री ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक कोई न कोई अदृश्य हाथ इन माफियाओं की पीठ थपथपा रहा है।

मामला लखनऊ पहुंचने पर शुरू हुआ डैमेज कंट्रोल का खेल

Illegal Mining in Pilibhit की यह गूंज जब लखनऊ तक पहुंची और मामला पूरी तरह बेकाबू होने लगा, तब जाकर जिला प्रशासन ने डैमेज कंट्रोल (Damage Control) की कवायद शुरू की। एक प्रेस वार्ता (Press Conference) के दौरान जिला अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने मीडिया के सामने आकर सख्त लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिले के किसी भी कोने में अवैध खनन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए जिम्मेदारी तय की कि अगर अब पीलीभीत के किसी भी थाना क्षेत्र में अवैध खनन पाया गया, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी और हल्का के एसडीएम स्वयं सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी। डीएम ने दावा किया कि लगातार मिल रही शिकायतों पर नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है और तत्काल छापेमारी की जाएगी ताकि जिला स्तर पर Illegal Mining in Pilibhit को नेस्तनाबूद किया जा सके।

हालांकि, जिलाधिकारी की इस प्रेस वार्ता और कड़े बयानों के बाद भी जनता के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीधे नाम लेकर अधिकारियों को फटकारा था, तब भी पीलीभीत पुलिस और प्रशासनिक अमला हरकत में क्यों नहीं आया? क्या खनन माफियाओं का सिंडिकेट इतना मजबूत हो चुका है कि उसे सूबे के सबसे शक्तिशाली पद से जारी आदेशों का भी कोई खौफ नहीं है? गजरौला की तस्वीरें साफ बयां करती हैं कि डीएम साहब के दावों और धरातल की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। जब तक थाना स्तर और तहसील स्तर के अधिकारियों पर वास्तविक गाज नहीं गिरेगी, तब तक कागजी आदेशों और प्रेस वार्ताओं से Illegal Mining in Pilibhit के इस संगठित तंत्र को ध्वस्त करना नामुमकिन नजर आता है। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी की इस खुली चेतावनी के बाद क्या सचमुच गजरौला और पूरे पीलीभीत में जेसीबी मशीनें थमती हैं या फिर माफिया इसी तरह प्रशासन के इकबाल को चुनौती देते रहेंगे।

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