भीलवाड़ा: राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इस वर्ष हनुमान जयंती पर एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक समागम की साक्षी बनने जा रही है। सनातन संस्कृति को घर-घर पहुँचाने के संकल्प के साथ हरि सेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर द्वारा एक विशाल धर्म जागरण अभियान का आगाज किया गया है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत हजारों की संख्या में धार्मिक ग्रंथों का निःशुल्क वितरण कर नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
हनुमान जयंती के पावन पर्व पर आश्रम द्वारा 52,100 हनुमान चालीसा की प्रतियाँ और 1,001 पावन श्रीरामचरितमानस ग्रंथों का वितरण किया जाएगा। यह अभियान केवल भीलवाड़ा शहर तक सीमित नहीं है। सेवाभावी कार्यकर्ताओं के माध्यम से इन पवित्र ग्रंथों को सुदूर जनजातीय क्षेत्रों जैसे प्रतापगढ़, उदयपुर, सलूम्बर और बारां जिलों तक भी पहुँचाया जाएगा। इस पुनीत कार्य में धर्मप्रेमी दिलीप हरपलानी का विशेष सहयोग रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने वर्तमान समय में इस पहल की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से कटती जा रही है। स्वामी जी ने जोर देकर कहा "हनुमान चालीसा और रामचरितमानस केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। इनका नियमित पाठ युवाओं में 'बल' और 'बुद्धि' का संचार करेगा। जब हमारे युवा संस्कारित और मानसिक रूप से सुदृढ़ होंगे, तभी भारत पुनः विश्व गुरु बनने की अपनी गौरवशाली यात्रा को पूर्ण कर सकेगा।"
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के प्रमुख संतों और विद्वानों ने शिरकत की। पंचमुखी दरबार के महंत लक्ष्मण दास त्यागी महाराज ने रामचरितमानस की महिमा बताते हुए कहा कि इस एक ग्रंथ में चारों वेदों, छह शास्त्रों और अठारह पुराणों का सार निहित है। उन्होंने हरि सेवा आश्रम के इस प्रयास को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि साहित्य के माध्यम से धर्म की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है। इस अवसर पर ओंकारेश्वर के महंत श्याम सुंदर दास, महंत बाबुगिरी महाराज, महंत संतदास, और ब्रह्मचारी मिहिर सहित कई आध्यात्मिक विभूतियाँ उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम की भव्यता में शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी अपना योगदान दिया। आयोजन के दौरान पंडित सत्यनारायण शर्मा, मनमोहन शर्मा, चांदमल सोमानी, विनोद झूरानी, सुभाष चेचाणी और यश गिदवानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भीलवाड़ा में शुरू हुआ यह अभियान न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार भी करेगा। जानकारों का मानना है कि इस तरह के व्यापक वितरण कार्यक्रमों से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सामाजिक समरसता को बल मिलेगा।
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