भीलवाड़ा में फूटा आस्था का महाज्वालामुखी! शंकराचार्य के एक बयान से झूम उठे हजारों भक्त, हरि शेवा आश्रम में उमड़ा जनसैलाब

खबर सार :-
भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में पुरुषोत्तम मास के तहत पांच दिवसीय 'भक्तमाल कथा' का भव्य शंखनाद हुआ। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के प्रवचनों को सुनने उमड़ा जनसैलाब।
भीलवाड़ा में फूटा आस्था का महाज्वालामुखी! शंकराचार्य के एक बयान से झूम उठे हजारों भक्त, हरि शेवा आश्रम में उमड़ा जनसैलाब
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इस समय पूरी तरह से वैराग्य और अध्यात्म के अनूठे रंग में रंग चुकी है। शहर का कोना-कोना हरि नाम के जयकारों से गूंज रहा है। मौका है पवित्र पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य धार्मिक अनुष्ठान का। सनातन सेवा समिति (Sanatan Seva Samiti) के बैनर तले स्थानीय हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में पांच दिनों तक चलने वाले संगीतमय "भक्तमाल कथा" का मंगलवार को बेहद दिव्य और ऐतिहासिक आगाज हुआ। कथा के पहले ही दिन पंडाल में आस्था का ऐसा समंदर उमड़ा कि व्यवस्थाएं छोटी पड़ गईं। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ श्रद्धालु और उनके हाथों में लहराती भक्ति की ध्वज पताकाएं दिखाई दे रही थीं।

यह पूरा आयोजन महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज (Mahamandleshwar Swami Hansram Ji Udasi Maharaj) की देखरेख और पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है। वहीं, भक्तों को अपनी अमृतमयी वाणी से सराबोर करने के लिए खुद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज (Jagadguru Shankaracharya Swami Gyananand Teerth Ji Maharaj) व्यासपीठ पर विराजमान हैं। मंगलवार को मुख्य कथा की शुरुआत से पहले समूचे आश्रम परिसर को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया। विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्य व्यासपीठ का पूजन करवाया। जैसे ही शंकराचार्य जी महाराज ने पंडाल में प्रवेश किया, वहां मौजूद संत समाज और आम श्रद्धालुओं ने उन पर फूलों की बारिश कर दी और पूरा इलाका जयघोष से कांप उठा। इस धार्मिक उत्सव की वजह से Bhilwara Bhaktamal Katha Mahotsav 2026 सोशल मीडिया से लेकर आम जनमानस के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।

 भक्त और भगवान में कोई भेद नहीं: शंकराचार्य

व्यासपीठ से भक्तों को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज ने सनातन धर्म की गहराइयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रसिद्ध ग्रंथ 'भक्तमाल' के बेहद पवित्र मंगलाचरण "भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम वपु एक" की ऐसी सरल और मर्मस्पर्शी व्याख्या की कि वहां मौजूद हर शख्स मंत्रमुग्ध हो गया। शंकराचार्य जी ने कहा कि संसार के लोगों को भले ही भगवान, उनकी भक्ति, उनका सच्चा भक्त और राह दिखाने वाले सद्गुरु ये चारों अलग-अलग नजर आते हों, लेकिन असलियत में ये सब एक ही परम तत्व के अलग-अलग रूप हैं। इनमें कोई अंतर नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि आज के इस भागदौड़ भरे और कलियुग के दौर में अगर कोई इंसान मानसिक शांति चाहता है, तो संतों और सच्चे भक्तों के जीवन चरित्र को सुनना ही सबसे अचूक उपाय है। जो भी व्यक्ति बिना किसी कपट और पूरी श्रद्धा के साथ ईश्वर के भक्तों की गाथा सुनता है, उसके जीवन के सारे कष्ट, तनाव और परेशानियां अपने आप खत्म हो जाती हैं। वेदों, पुराणों और हमारे प्राचीन इतिहास गवाह हैं कि इस धरती पर जितना आदर भगवान का होता है, उतना ही पूजनीय उनका सच्चा भक्त भी होता है। कथा के दौरान उन्होंने चैतन्य महाप्रभु की अनन्य कृष्ण भक्ति, हरिनाम संकीर्तन (Harinam Sankirtan) की महत्ता और वैष्णव परंपरा (Vaishnav Tradition) के गौरवशाली इतिहास को बेहद खूबसूरती से जनता के सामने रखा।

 भजनों की धुन पर झूम उठे हजारों लोग

जैसे ही व्यासपीठ से सुमधुर भजनों और संकीर्तन का दौर शुरू हुआ, पंडाल में मौजूद महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग अपनी सुध-बुध खोकर नाचने लगे। पूरा माहौल ऐसा लग रहा था मानो साक्षात वृंदावन भीलवाड़ा की धरती पर उतर आया हो। पहले दिन की कथा के समापन पर भव्य महाआरती उतारी गई, जिसमें हजारों दीपकों की रोशनी से पूरा आश्रम जगमगा उठा। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों में विशेष प्रसाद का वितरण किया गया।

आपको बता दें कि इस पवित्र महीने में यहाँ सिर्फ कथा ही नहीं हो रही, बल्कि आश्रम के भीतर रोज सुबह से लेकर शाम तक धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चल रहा है। यहाँ प्रतिदिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष विष्णु यज्ञ (Vishnu Yajna), महादेव का रुद्राभिषेक (Rudrabhishek), और सांझ ढलते ही गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को हुए मुख्य यज्ञ में मुख्य यजमान के तौर पर डॉ. प्रकाश थावानी और अजमेर से आए दौलतानी परिवार ने पवित्र आहुतियां डालीं। साथ ही हरि सीधेश्वर महादेव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर देश में सुख-समृद्धि की कामना की गई।

 30 मई तक बहेगी धर्म की त्रिवेणी

आश्रम के पूजनीय संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने भीलवाड़ा सहित आसपास के इलाकों से आए तमाम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर इस महाआयोजन का हिस्सा जरूर बनें। संतों ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में इस तरह की कथा सुनना सौभाग्य की बात है। भीलवाड़ा में इस समय धर्मगंगा की जो त्रिवेणी बह रही है, उसमें डुबकी लगाने का मौका हाथ से नहीं गंवाना चाहिए।

आयोजकों के मुताबिक, यह विशेष Bhilwara Bhaktamal Katha Mahotsav 2026 आने वाली 30 मई तक लगातार जारी रहेगा। कथा का समय रोजाना दोपहर 3 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक तय किया गया है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए आश्रम प्रशासन और सनातन सेवा समिति ने सुरक्षा और बैठने के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। अध्यात्म के खोजी लोगों के लिए यह पांच दिन बेहद खास होने वाले हैं।

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