भीलवाड़ा में सामाजिक एकता की नई मिसाल: 'एक जाजम, एक पंगत' पर हजारों ने ग्रहण किया महाप्रसाद

खबर सार :-
भीलवाड़ा के नौगांवा में भागवत समरसता महोत्सव के दौरान 'एक जाजम, एक पंगत' महाभोज का आयोजन हुआ। हजारों टिफिनों से बने महाप्रसाद और गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज के भजनों ने सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल पेश की। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

भीलवाड़ा में सामाजिक एकता की नई मिसाल: 'एक जाजम, एक पंगत' पर हजारों ने ग्रहण किया महाप्रसाद
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: राजस्थान का वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इन दिनों अध्यात्म और सामाजिक समरसता के एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। नौगांवा स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर में आयोजित 'भागवत समरसता महोत्सव' के छठे दिन जो दृश्य उभरा, उसने आधुनिक समाज के सामने एकता की एक नई परिभाषा लिख दी। यहाँ न कोई बड़ा था, न छोटा-हजारों श्रद्धालुओं ने जाति और वर्ग के भेदों को भुलाकर 'एक जाजम, एक पंगत' की परंपरा को जीवंत कर दिया।

 समरसता महाभोज: हजारों घरों के टिफिन और अटूट प्रेम

इस महोत्सव का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण 'समरसता महाभोज' रहा। इस आयोजन की विशेषता यह थी कि यह किसी एक रसोई में नहीं बना था, बल्कि शहर की हजारों माताएं-बहनें अपने घरों से लापसी और पूरी के टिफिन बनाकर लाई थीं। जब इन हजारों टिफिनों का प्रसाद एक साथ मिलाया गया, तो वह एक विशाल 'समरसता महाप्रसाद' बन गया। मंत्री सुरेश रावत से लेकर समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक, सभी ने जमीन पर बैठकर एक साथ भोजन किया। गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज ने स्वयं आमजन के बीच बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सादगी का संदेश दिया।

 गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज ने समझाया संगठन का महत्व

कथा व्यास जोधपुर के विख्यात संत श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने कृष्ण-रुक्मणी विवाह और गोवर्धन लीला के प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पर्वत उठाना श्रीकृष्ण के लिए पलक झपकने जैसा था, लेकिन उन्होंने ग्वालों की लाठियों का सहारा लेकर यह सिखाया कि जब समाज संगठित होता है, तो बड़ी से बड़ी आपदा को भी टाला जा सकता है। महाराज श्री ने कोरोना काल का उल्लेख करते हुए भारतीय परिवार व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा "जब दुनिया अकेलेपन से अवसाद में थी, तब भारत के मजबूत पारिवारिक ढांचे और आरएसएस (RSS) जैसे संगठनों की सेवा भावना ने समाज को टूटने से बचाया।"

 राष्ट्र सेवा का आधुनिक मंत्र: बिजली और ईंधन की बचत

संत श्री ने केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक राष्ट्रवाद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आज के समय में बिजली बचाना और ईंधन की बचत करना भी राष्ट्र सेवा का ही एक रूप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत और संगठन (संघ) दोनों का लक्ष्य एक ही है-एक जागृत और संगठित समाज का निर्माण।

 समापन समारोह और व्यवस्थाएं

माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान और मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि गुरुवार सुबह 9 बजे 'सुदामा चरित्र' की कथा के साथ इस भव्य महोत्सव का समापन होगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रामधाम से कार्यक्रम स्थल तक निःशुल्क बस सेवा संचालित की जा रही है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन, महंत लक्ष्मण दास त्यागी सहित कई विधायक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक समरसता अभियान की सराहना की।

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