बांग्लादेश चुनाव 2026: बीएनपी की कमान तारिक रहमान के हाथ, सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव

खबर सार :-
तारिक रहमान का बीएनपी अध्यक्ष बनना बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। जहां एक ओर यह पार्टी को नया नेतृत्व और दिशा दे सकता है, वहीं दूसरी ओर आंतरिक कलह और गठबंधन तनाव बीएनपी के लिए चुनौती बने रहेंगे। 12 फरवरी 2026 का चुनाव तय करेगा कि यह नेतृत्व बदलाव कितना प्रभावी साबित होता है।

बांग्लादेश चुनाव 2026: बीएनपी की कमान तारिक रहमान के हाथ, सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव
खबर विस्तार : -

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में आम चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, देश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच बयानबाज़ी, रणनीति और गठबंधन को लेकर गतिविधियां खुलकर सामने आ रही हैं। इसी बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए संकेत दिया है कि पार्टी की कमान अब तारिक रहमान औपचारिक रूप से संभालेंगे।

खालिदा जिया के निधन के बाद खाली था अध्यक्ष पद

बीएनपी की प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के 30 दिसंबर 2025 को निधन के बाद से पार्टी का अध्यक्ष पद खाली था। खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक मजबूत आवाज़ रही हैं और उनके जाने के बाद पार्टी नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज थीं। अब बीएनपी ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनके बेटे और वर्तमान कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान को正式 रूप से अध्यक्ष बनाया जाएगा।

मिर्जा फखरुल का ऐलान

बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने सिलहट जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तारिक रहमान अगले कुछ दिनों में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल लेंगे। फखरुल ने यह भी बताया कि पार्टी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत सिलहट से करेगी, जो बीएनपी की पुरानी राजनीतिक परंपरा रही है।

चुनाव को लेकर बीएनपी का रुख

बीएनपी नेतृत्व ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज किया है। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, पार्टी का मानना है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव ही लोकतंत्र को मजबूत कर सकते हैं। फखरुल ने कहा कि बीएनपी लगातार चुनाव की मांग करती रही है और वह किसी भी तरह के डर या दबाव से पीछे हटने वाली नहीं है।

अंतरिम सरकार पर तीखा हमला

बीएनपी ने नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना की है। फखरुल का आरोप है कि अंतरिम सरकार के गठन के बाद बीते एक साल में “भीड़ की हिंसा” का चलन बढ़ा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। उनका कहना है कि इस संस्कृति का मुकाबला केवल सामूहिक विरोध और निष्पक्ष चुनाव के ज़रिये ही किया जा सकता है।

गठबंधन में बढ़ता तनाव

चुनाव से पहले बीएनपी के भीतर और उसके गठबंधन सहयोगियों के साथ तनाव भी उभरकर सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन दलों को दी गई सीटों पर बीएनपी नेताओं के बागी उम्मीदवार के तौर पर उतरने से सीट-शेयरिंग व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे कई इलाकों में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।

बोगुरा और जेनेदाह सीटों पर विवाद

बोगुरा-2 सीट पर नागोरिक ओइक्या के अध्यक्ष महमूदुर रहमान मन्ना ने बीएनपी उम्मीदवार पर नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं जेनेदाह-4 सीट पर बीएनपी में हाल ही में शामिल हुए राशिद खान ने बागी उम्मीदवारों के समर्थकों पर धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन घटनाओं के चलते पार्टी ने कम से कम नौ नेताओं को निष्कासित भी किया है।

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